ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोंडागांव। कोंडागांव,न्यायपालिका एवं पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों को न्यायिक प्रक्रियाओं की जानकारी देने के उद्देश्य से मंगलवार को जिला न्यायालय परिसर में प्रशिक्षु सहायक उप निरीक्षकों की बैठक आयोजित की गई। बैठक प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री खिलावन राम रिगरी के मार्गदर्शन में संपन्न हुई।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने की अध्यक्षता
बैठक की अध्यक्षता अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोंडागांव श्री विकम प्रताप चंद्रा ने की। इस अवसर पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती रेशमा बैरागी पटेल, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सुश्री गायत्री साय तथा प्रशिक्षु सहायक उप निरीक्षक उपस्थित रहे।
न्याय व्यवस्था में पुलिस की भूमिका पर दिया गया मार्गदर्शन
बैठक को संबोधित करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री विकम प्रताप चंद्रा ने कहा कि पुलिस विभाग आमजन और न्याय व्यवस्था के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी है। कानून का प्रभावी क्रियान्वयन, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा तथा समाज में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस अधिकारियों की अहम भूमिका होती है।
उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों को अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी, निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ करने की सलाह दी।
अपराध अनुसंधान और साक्ष्य संकलन पर दी गई जानकारी
बैठक के दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों को अपराध पंजीयन, अनुसंधान की प्रक्रिया, साक्ष्य संकलन, गवाहों के महत्व, न्यायालयीन कार्यवाही में पुलिस की भूमिका तथा विधिक प्रावधानों के प्रभावी पालन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।
अधिकारियों को बताया गया कि किसी भी प्रकरण में निष्पक्ष जांच और तथ्यात्मक साक्ष्यों का संकलन न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया को मजबूत बनाता है और न्याय व्यवस्था में विश्वास बढ़ाता है।
संवेदनशील मामलों में विशेष सावधानी बरतने के निर्देश
बैठक में महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों एवं समाज के कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों में विशेष संवेदनशीलता बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि कानून का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि पीड़ितों को न्याय दिलाना और उनके अधिकारों की रक्षा करना भी है।
जनहित और निष्पक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर
बैठक के अंत में प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों को कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, निष्पक्ष जांच, अनुशासन एवं जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन करने तथा आमजन के प्रति संवेदनशील और उत्तरदायी दृष्टिकोण अपनाने के निर्देश दिए गए।








