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नैनो डीएपी और यूरिया से बढ़ा उत्पादन, किसान सफल

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ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोण्डागांवकोण्डागांव, कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों और उन्नत कृषि आदानों के उपयोग से किसानों को बेहतर परिणाम मिल रहे हैं। बड़ेराजपुर विकासखंड के ग्राम पिटेचुवा निवासी प्रगतिशील किसान दुखा राम मरकाम ने नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के प्रयोग से धान उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हासिल कर जिले के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा प्रस्तुत की है।

दो वर्षों से कर रहे हैं नैनो उर्वरकों का उपयोग

15 एकड़ कृषि भूमि पर खेती करने वाले किसान दुखा राम मरकाम पिछले दो वर्षों से अपने खेतों में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया का उपयोग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इन उर्वरकों के प्रयोग से पोषक तत्व सीधे पौधों तक पहुंचते हैं, जिससे फसल की वृद्धि बेहतर होती है और उत्पादन में बढ़ोतरी होती है।

वैज्ञानिक पद्धति से हो रहा बेहतर फसल विकास

किसान मरकाम के अनुसार धान की रोपाई के लगभग 30 दिन बाद नैनो उर्वरकों का पहला छिड़काव किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर 50 से 60 दिनों के बीच दूसरा छिड़काव किया जाता है। इस पद्धति से पौधे अधिक स्वस्थ, मजबूत तथा रोग प्रतिरोधक बनते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होता है।

उत्पादन बढ़ा, लागत में आई कमी

दुखा राम मरकाम बताते हैं कि नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग से अब उन्हें प्रति एकड़ 15 से 20 क्विंटल तक धान उत्पादन प्राप्त हो रहा है। वहीं उर्वरक उपयोग की दक्षता बढ़ने से खेती की लागत को नियंत्रित करने में भी मदद मिली है।

आधी हुई डीएपी की खपत

पूर्व में किसान प्रति एकड़ लगभग 50 किलोग्राम दानेदार डीएपी का उपयोग करते थे, जिस पर करीब 1850 रुपये खर्च होते थे और औसत उत्पादन 10 से 15 क्विंटल प्रति एकड़ मिलता था। नैनो डीएपी के उपयोग के बाद दानेदार डीएपी की आवश्यकता लगभग 50 प्रतिशत कम हो गई है। वर्तमान में प्रति एकड़ दो बोतल नैनो डीएपी का उपयोग किया जा रहा है, जिस पर लगभग 1200 रुपये का खर्च आता है।

उत्पादन में 30 प्रतिशत वृद्धि, किसानों को आर्थिक लाभ

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार नैनो उर्वरकों के उपयोग से उत्पादन में लगभग 30 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही उर्वरक लागत में लगभग 50 प्रतिशत तक कमी आई है। फसल में हरियाली, जड़ों के विकास, शाखाओं की संख्या और बालियों की वृद्धि में भी सकारात्मक सुधार देखा गया है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ प्राप्त हो रहा है।

अन्य किसानों के लिए बन रहे प्रेरणा स्रोत

दुखा राम मरकाम की सफलता से प्रेरित होकर क्षेत्र के अन्य किसान भी नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग में रुचि दिखा रहे हैं। इससे कृषि में आधुनिक, वैज्ञानिक और टिकाऊ खेती पद्धतियों को बढ़ावा मिल रहा है, जो भविष्य में किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

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