ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोंडागांव । सकल जैन समाज के जैन मुनि वीरभद्र के प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु ओसवाल भवन पहुंच रहे हैं। इस दौरान मुनि श्री ने तप, संयम और जीवनशैली से जुड़े महत्वपूर्ण विचार साझा किए।
मन पर नियंत्रण ही सच्ची साधना
मुनि वीरभद्र जी ने कहा कि केवल शरीर का नहीं, बल्कि मन का तप भी आवश्यक है। उन्होंने बताया कि उन्होंने 175 दिनों का कठोर तप किया, लेकिन उससे अधिक तप नहीं किया ताकि मन में अहंकार उत्पन्न न हो।
उन्होंने कहा कि मन पर नियंत्रण ही सच्ची साधना है और आत्मसंयम से ही जीवन सफल बनता है।
आत्मसंयम और दृढ़ संकल्प जरूरी
मुनि श्री ने कहा कि हर व्यक्ति तप कर सकता है, बस इसके लिए आत्मसंयम और मजबूत इच्छाशक्ति जरूरी है। उन्होंने सभी को संयमित जीवन अपनाने की प्रेरणा दी।
स्वस्थ जीवन के लिए दिनचर्या पर जोर
उन्होंने बताया कि सूर्य उदय के बाद और सूर्यास्त से पहले ही भोजन और जल ग्रहण करना चाहिए। इससे शरीर स्वस्थ रहता है और कई बीमारियों से बचाव संभव है।
युवा पीढ़ी की जीवनशैली पर चिंता
मुनि वीरभद्र जी ने आज की युवा पीढ़ी की जीवनशैली पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मोबाइल का अत्यधिक उपयोग युवाओं को समाज, परिवार और धर्म से दूर कर रहा है।
सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव बताए
उन्होंने कहा कि यूट्यूब, फेसबुक और व्हाट्सएप का अधिक उपयोग बच्चों के व्यवहारिक ज्ञान को कमजोर कर रहा है। इससे बच्चे धीरे-धीरे सामाजिक और पारिवारिक संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं।
अभिभावकों को दी सलाह
मुनि श्री ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों के मोबाइल उपयोग पर निगरानी रखें, खासकर रात के समय।
उन्होंने कहा कि तकनीक जरूरी है, लेकिन उसका संतुलित उपयोग ही जीवन को सही दिशा देता है।








