ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोंडागांव । जिले के ग्राम मथनीबेड़ा में शुक्रवार शाम बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं स्थानीय विधायक सुश्री लता उसेंडी ने “अस्मिता परियोजना” का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीता शोरी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
महिलाओं को उद्यमी बनाने की पहल
विधायक सुश्री लता उसेंडी ने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और सफल उद्यमी बनाना है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत महिलाओं को व्यक्तिगत पोल्ट्री शेड उपलब्ध कराकर स्थायी स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे।
गांव के विकास पर भी जोर
विधायक ने कहा कि गांव के समग्र विकास के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही गांव में पक्की सड़क सहित सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
पायलट प्रोजेक्ट के रूप में मथनीबेड़ा चयनित
कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना ने जानकारी दी कि अस्मिता परियोजना के तहत मथनीबेड़ा गांव को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया है। पहले चरण में 7 महिला हितग्राहियों का चयन किया गया है और आगे अन्य महिलाओं को भी आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जाएगा।
जनप्रतिनिधियों ने सराहा प्रयास
कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य श्री नंदलाल राठौर सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी इस पहल को महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य श्रीमती रामदई नाग, श्री दीपेश अरोरा, श्री प्रेम सिंह नाग, जनपद पंचायत सीईओ श्री उत्तम महोबिया एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
त्रिपक्षीय मॉडल पर आधारित है परियोजना
“अस्मिता परियोजना” एक त्रिपक्षीय मॉडल पर आधारित है, जिसमें जिला प्रशासन, महिला लाभार्थी और एबिस फूड एंड प्रोटीन्स की संयुक्त भागीदारी रहेगी।
- प्रशासन करेगा मार्गदर्शन और निगरानी
- महिलाएं करेंगी संचालन और प्रबंधन
- एबिस कंपनी देगी तकनीकी सहयोग और बाजार उपलब्धता
आय बढ़ाने का लक्ष्य
परियोजना के तहत महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण, वैज्ञानिक प्रबंधन और निरंतर फील्ड सपोर्ट प्रदान किया जाएगा। इससे उत्पादन बढ़ेगा और जोखिम कम होगा।
- प्रति महिला सालाना लगभग 1.5 लाख रुपये शुद्ध आय का लक्ष्य
- मासिक औसत आय 12-13 हजार रुपये संभावित
भविष्य में और गतिविधियां जुड़ेंगी
इस परियोजना के माध्यम से न केवल महिलाओं की आय बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर पोषण और प्रोटीन उपलब्धता में भी सुधार होगा। भविष्य में इसमें सुअर पालन और मछली पालन को भी शामिल करने की योजना है।








