ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोंडागांव । छत्तीसगढ़ में पनका (पनिका) समाज द्वारा अनुसूचित जनजाति (ST) में पुनः शामिल किए जाने की मांग को लेकर आंदोलन तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में जिला कोंडागांव के मानिकपुरी पनका/पनिका भवन में ST पुनः बहाली हेतु जिला स्तरीय महाबैठक का आयोजन किया गया।
50 वर्षों से जारी है पुनः बहाली की मांग
बैठक में वक्ताओं ने बताया कि वर्ष 1971 से पूर्व पनका (पनिका) समाज अनुसूचित जनजाति वर्ग में शामिल था, लेकिन 8 दिसंबर 1971 को बिना पूर्व सूचना और सामाजिक स्थिति का आकलन किए उन्हें इस श्रेणी से बाहर कर दिया गया। तब से समाज लगातार पुनः बहाली की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
समाज की परंपरा और सांस्कृतिक पहचान
बैठक में यह भी उल्लेख किया गया कि पनका (पनिका) समाज द्रविड़ मूल का है और अपनी समृद्ध कला, संस्कृति तथा परंपराओं के लिए जाना जाता है। बस्तर दशहरा जैसे विश्व प्रसिद्ध आयोजन में काछन देवी से आशीर्वाद लेने की परंपरा में इस समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। साथ ही, कोटवार, मांझी, पूजारी और अन्य पारंपरिक दायित्व भी पीढ़ियों से निभाए जा रहे हैं।
हथकरघा और पारंपरिक कला में पहचान
समाज के लोग प्राचीन समय से हथकरघा, पाटा कपड़ा, पिचुरी और अन्य पारंपरिक कलाओं के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। इनकी कला न केवल जनजातीय क्षेत्रों में बल्कि व्यापक समाज में भी पहचान रखती है।
संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले एकजुटता
पनका (पनिका) ST पुनः बहाली संयुक्त संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में समाज के विभिन्न संगठनों ने एकजुट होकर आंदोलन को सशक्त बनाने का संकल्प लिया है। प्रांतीय संयोजक मनोज सूर्यवंशी पनका और प्रेम सागर पंत सहित कई प्रमुख पदाधिकारी बैठक में उपस्थित रहे।
रणनीति पर हुई विस्तृत चर्चा
महाबैठक में “जय जय पनिका, जय काछन” के उद्घोष के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसमें पुनः बहाली से जुड़े तथ्यों को प्रस्तुत किया गया और आगामी चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
बड़ी संख्या में समाज के लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर जिले के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। समाजसेवियों और पदाधिकारियों ने एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
अधिकारों की लड़ाई के लिए लामबंद समाज
बैठक के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने ST पुनः बहाली के लिए संगठित होकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। समाज का कहना है कि जब तक उन्हें उनका अधिकार वापस नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।








