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UGC New Rule पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, जातिगत भेदभाव पर सवाल

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नई दिल्ली। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाते हुए उनके क्रियान्वयन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान इन नियमों को अस्पष्ट बताते हुए इनके संभावित दुरुपयोग की आशंका जताई।

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि देश ने जातिविहीन समाज की दिशा में काफी प्रगति की है और अब यह देखना जरूरी है कि कहीं नए नियम समाज को फिर से विभाजन की ओर तो नहीं ले जा रहे।

जातिगत भेदभाव को लेकर अदालत की चिंता

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु जैन ने दलील दी कि UGC के रेगुलेशन के सेक्शन 3C में SC, ST और OBC से जुड़े प्रावधान जातिगत भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं। कोर्ट ने इस दलील को गंभीरता से लेते हुए नियमों के अमल पर अस्थायी रोक लगा दी।

CJI सूर्यकांत की अहम टिप्पणी

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने SC/ST छात्रों के लिए अलग-अलग हॉस्टल जैसी व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आरक्षित वर्ग में भी कई लोग अब आर्थिक और सामाजिक रूप से समृद्ध हो चुके हैं और उनके पास अन्य छात्रों की तुलना में बेहतर संसाधन उपलब्ध हैं। ऐसे में इन व्यवस्थाओं पर पुनर्विचार आवश्यक है।

UGC के नए नियमों पर विवाद क्यों?

UGC ने 13 जनवरी 2026 को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स’ के तहत नए नियम लागू किए थे। इनका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान आदि के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकना था। हालांकि, इन नियमों की भाषा और प्रावधानों को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।

अगली सुनवाई 19 मार्च को

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। तब तक UGC के नए नियम लागू नहीं किए जाएंगे।

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