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Zomato-Swiggy डिलीवरी बॉय को राहत, गिग वर्कर्स के लिए सुरक्षा नियम ड्राफ्ट जारी

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नई दिल्ली । Zomato, Swiggy समेत अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले डिलीवरी बॉय और राइडर्स के लिए यह अब तक की सबसे बड़ी राहत की खबर है। लंबे संघर्ष और लगातार उठती मांगों के बाद केंद्र सरकार ने गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा नियमों का मसौदा जारी कर दिया है। श्रम मंत्रालय द्वारा लाए गए इस ड्राफ्ट से संकेत मिलता है कि सरकार अब गिग वर्कर्स की समस्याओं को गंभीरता से ले रही है।

सरकार ने सुनी गिग वर्कर्स की आवाज

अब तक कई प्लेटफॉर्म कंपनियों पर यह आरोप लगते रहे हैं कि वे गिग वर्कर्स की मांगों को नजरअंदाज करती हैं। लेकिन केंद्र सरकार द्वारा जारी यह मसौदा साफ करता है कि गिग वर्कर्स की आवाज को अब अनदेखा नहीं किया जाएगा। श्रम मंत्रालय का यह कदम लाखों डिलीवरी बॉय और राइडर्स के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर आया है।

कानून की नजर में पहली बार पहचान और मान्यता

इन नए नियमों के तहत गिग वर्कर्स को पहली बार कानून की नजर में स्पष्ट पहचान मिलेगी। अब उन्हें सिर्फ स्वतंत्र ठेकेदार या अस्थायी कर्मचारी नहीं माना जाएगा, बल्कि श्रमिक के रूप में कानूनी मान्यता दी जाएगी। इससे गिग वर्कर्स सिस्टम में अदृश्य नहीं रहेंगे और उनके अधिकार सुरक्षित होंगे।

सामाजिक सुरक्षा के लिए पात्रता की शर्तें

ड्राफ्ट नियमों के अनुसार—

  • यदि कोई गिग वर्कर किसी एक प्लेटफॉर्म पर साल में कम से कम 90 दिन काम करता है
  • या एक से अधिक प्लेटफॉर्म पर मिलाकर 120 दिन काम करता है

तो वह सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए पात्र माना जाएगा। इससे बड़ी संख्या में गिग वर्कर्स सुरक्षा के दायरे में आ सकेंगे।

सरकारी पोर्टल पर पंजीकरण और डिजिटल पहचान

सभी गिग वर्कर्स का पंजीकरण एक सरकारी पोर्टल पर किया जाएगा।
पंजीकरण के बाद प्रत्येक वर्कर को

  • यूनिवर्सल अकाउंट नंबर
  • डिजिटल पहचान पत्र

दिया जाएगा। यह पहचान इतनी मजबूत होगी कि कंपनियां गुप्त एल्गोरिदम के जरिए अचानक वर्कर्स को प्लेटफॉर्म से बाहर नहीं कर पाएंगी।

प्लेटफॉर्म कंपनियों की कानूनी जिम्मेदारी तय

नए नियमों के तहत अब Zomato, Swiggy और अन्य प्लेटफॉर्म कंपनियों के लिए

  • सभी गिग वर्कर्स का पंजीकरण कराना
  • उनका डेटा सरकार के साथ साझा करना
  • हर तीन महीने में जानकारी अपडेट करना

कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। अब “हम सिर्फ टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म हैं” कहकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकेगा।

सामाजिक सुरक्षा कोष का गठन

गिग वर्कर्स के लिए एक विशेष सामाजिक सुरक्षा कोष बनाया जाएगा।
इस कोष में

  • प्लेटफॉर्म कंपनियों और एग्रीगेटर्स को
  • अपनी आय का एक निश्चित प्रतिशत

जमा करना होगा। यह कोई दान या CSR गतिविधि नहीं, बल्कि कानून द्वारा तय जिम्मेदारी होगी।

राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन

इन नियमों के तहत एक राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन भी किया जाएगा।
यह बोर्ड

  • गिग वर्कर्स के कल्याण से जुड़ी योजनाएं बनाएगा
  • उनकी समस्याओं को सुनेगा
  • नीतियों को बेहतर बनाने के लिए विशेषज्ञ समितियों की मदद लेगा

गिग वर्कर्स को मिलने वाले प्रमुख लाभ

इन नियमों के लागू होने के बाद गिग वर्कर्स को—

  • दुर्घटना बीमा
  • स्वास्थ्य बीमा
  • जीवन बीमा
  • न्यूनतम मजदूरी
  • मातृत्व और स्वास्थ्य लाभ
  • पेंशन और वृद्धावस्था लाभ
  • कार्यस्थल सुरक्षा

जैसे कई अहम अधिकार और सुविधाएं मिल सकेंगी।

लाखों डिलीवरी बॉय के लिए राहत की खबर

यह मसौदा साफ तौर पर दिखाता है कि डिलीवरी बॉय और राइडर्स का लंबा संघर्ष रंग ला रहा है। अगर ये नियम लागू होते हैं, तो भारत के गिग इकॉनमी सेक्टर में काम करने वाले लाखों लोगों की जिंदगी में बड़ा बदलाव आ सकता है।

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