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देवभोग में तूफान से 33 केवी पोल गिरे, 94 गांव अंधेरे में

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पितेश्वर हरपाल देवभोग (गरियाबंद)। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देवभोग ब्लॉक में गुरुवार रात आए तेज आंधी-तूफान और भारी बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। तूफान की तीव्रता इतनी अधिक थी कि 33 केवी विद्युत सप्लाई लाइन के दो बड़े पोल धराशायी हो गए, जिसके चलते देवभोग नगर पंचायत सहित ब्लॉक के 94 गाँवों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई। पूरा इलाका शुक्रवार सुबह से ही अंधेरे में डूबा हुआ है और जनजीवन पर इसका व्यापक असर देखा जा रहा है।बिजली विभाग के सूत्रों के अनुसार, बीती रात करीब 11 बजे के आसपास तेज हवाओं और बारिश के कारण सप्लाई लाइन के पोल गिर गए। ये पोल ब्लॉक मुख्यालय से जुड़े कई गाँवों के लिए मुख्य विद्युत आपूर्ति का माध्यम थे।

पोल गिरने से न केवल गांवों की रोशनी बुझ गई बल्कि नगर पंचायत देवभोग भी पूर्ण रूप से ब्लैकआउट की स्थिति में आ गया।लगातार 12 घंटे से अधिक समय तक बिजली गुल रहने से ग्रामीणों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। विद्युत चालित नलजल योजनाएं और हैंडपंप मोटरें बंद हो गई हैं, जिससे लोगों को पीने के पानी के लिए दूर-दूर भटकना पड़ रहा है।

बच्चों की ऑनलाइन और ऑफलाइन पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं घरेलू कामकाज, मोबाइल चार्जिंग और अन्य बुनियादी जरूरतों में भी कठिनाइयाँ बढ़ गई हैं। ग्रामीणों ने बताया कि लगातार बारिश और बिजली कटौती से रात में सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।घटना की जानकारी मिलते ही बिजली विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई है। गिरे हुए पोलों को खड़ा करने और क्षतिग्रस्त तारों को बदलने का कार्य जारी है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि यह 33 केवी की मेन लाइन है, जिसकी मरम्मत तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है। बारिश के बीच काम करना भी मुश्किल हो रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, पूरी आपूर्ति बहाल करने में कुछ घंटे से लेकर एक दिन तक का समय लग सकता है। प्राथमिकता के आधार पर नगर पंचायत और कुछ प्रमुख गांवों की लाइन पहले बहाल की जाएगी।
गांवों में लगातार बिजली गुल रहने से जन-जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और बिजली विभाग से जल्द से जल्द विद्युत आपूर्ति बहाल करने की मांग की है। उनका कहना है कि बारिश के मौसम में पानी और बिजली दोनों की समस्या एक साथ आने से स्थिति गंभीर होती जा रही है।देवभोग क्षेत्र में मानसून के दौरान तेज आंधी-तूफान आम बात है। यहां ऊँचे पेड़ और खुले क्षेत्रों में लगी बिजली सप्लाई लाइनें अक्सर तेज हवाओं में क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। पिछले वर्षों में भी कई बार इसी प्रकार के हादसे हो चुके हैं, लेकिन स्थायी समाधान अभी तक नहीं निकला है।

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