प्रीतेश्वर हरपाल गरियाबंद।राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर गरियाबंद के गांधी मैदान में लगातार 15 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हैं। हड़ताल का असर सीधे तौर पर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। अस्पतालों में मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, वहीं देखभाल और उपचार के अभाव में हालात बिगड़ते जा रहे हैं।
अस्पतालों में बढ़ी अव्यवस्था
NHM कर्मचारियों के कामकाज ठप होने से अस्पतालों में बुनियादी सेवाएं प्रभावित हो गई हैं। डॉक्टरों और अन्य स्टाफ पर कार्यभार बढ़ गया है। मरीजों के परिजन दवाइयों, इलाज और देखरेख के लिए भटकते नजर आ रहे हैं। आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित होने लगी हैं, जिससे आम जनता को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
विरोध के नए तरीके
अपनी मांगों को लेकर कर्मचारी लगातार विरोध के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। कभी वे प्रदेश के मंत्रियों के मुखौटे पहनकर व्यंग्य कर रहे हैं तो कभी शासन-प्रशासन की ओर से जारी ड्यूटी जॉइन करने के आदेश लैटर को जलाकर आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मुख्य मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।
मुख्य मांगें
NHM कर्मचारी लंबे समय से 10 सूत्रीय मांगों को लेकर संघर्षरत हैं। लेकिन उनका कहना है कि सबसे महत्वपूर्ण दो मांगों पर सरकार तुरंत कार्रवाई करे—
1. ग्रेड पे की बहाली
2. नियमितिकरण
NHM कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने अब भी उनकी आवाज़ नहीं सुनी, तो प्रदेश भर के करीब 16 हजार कर्मचारी रायपुर के तूता मैदान में विशाल आंदोलन करेंगे और “हल्ला बोल” करेंगे।
कर्मचारियों का पक्ष
पूजा साहू (स्टाफ नर्स) ने कहा, “हम महीनों से अपनी आवाज़ उठा रहे हैं, लेकिन सरकार सिर्फ आश्वासन देती है। मरीजों की चिंता हमें है, लेकिन हमारे हक और भविष्य की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।”
वहीं अनीस अख्तर (NHM कर्मचारी) ने कहा, “अगर शासन अब भी सुनवाई नहीं करता तो मजबूरी में आंदोलन और उग्र होगा। हम अपने अधिकारों से समझौता नहीं करेंगे।”
शासन की चुप्पी सवालों के घेरे में
स्वास्थ्य व्यवस्था पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं और अब NHM कर्मचारियों की लंबी हड़ताल ने सरकार की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। 15 दिन से स्वास्थ्य मिशन के हजारों कर्मचारी हड़ताल पर हैं, बावजूद इसके अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है।
लोग सवाल पूछ रहे हैं कि जब सरकार की योजनाएं और स्वास्थ्य मिशन जनता तक नहीं पहुंच पा रहा, तो फिर इतनी बड़ी स्वास्थ्य व्यवस्था आखिर किसके लिए है?
छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई, NHM कर्मचारियों का आंदोलन 15वें दिन भी जारी…








