अंकित टाटिया की रिपोर्ट…
बालोद (डौंडी)।
जिले के कोठारी कृषि केंद्र में किसानों को एक्सपायरी नैनो यूरिया बेचने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह पूरी घटना तब और गंभीर हो गई जब खुलासा हुआ कि इस पूरे खेल में कृषि अधिकारी की मौजूदगी में ही किसानों को यह एक्सपायरी दवाई बेची जा रही थी। जैसे ही किसानों को इस ठगी की जानकारी मिली, उन्होंने केंद्र में जमकर विरोध प्रदर्शन किया। हंगामे के बाद मौके पर मौजूद कृषि अधिकारी ने एक्सपायरी नैनो यूरिया वापस मंगवाकर उन्हें वैध दवाइयों से बदलने का आश्वासन दिया, तब जाकर मामला शांत हो पाया।
खाद संकट के बीच धोखाधड़ी
मानसून की दस्तक के साथ ही किसान खेतों में धान की रोपाई में जुटे हुए हैं, लेकिन इस वर्ष उन्हें समय पर और उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। सहकारी समितियों में यूरिया और डीएपी जैसे जरूरी उर्वरक उपलब्ध नहीं हैं, जबकि बाजार में बिचौलिए इन्हीं खादों को ऊंचे दाम पर बेच रहे हैं। इससे किसान आर्थिक रूप से और अधिक परेशान हो रहे हैं। इस पूरे प्रकरण का ज्वलंत उदाहरण कोठारी कृषि केंद्र बनकर सामने आया है, जहां पहले तो अवैध भंडारण किया गया, फिर अब एक्सपायरी नैनो यूरिया की बिक्री की गई।
अवैध भंडारण का इतिहास
उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले ही कृषि विभाग ने कोठारी कृषि केंद्र में दबिश देकर अवैध रूप से जमा यूरिया खाद को जब्त किया था। उस समय विभाग ने खाद को सरकारी रेट पर किसानों को वितरित करने का निर्णय लिया था। लेकिन ठीक उसी केंद्र में अब एक्सपायरी नैनो यूरिया की बिक्री से यह साफ हो गया है कि यहाँ पर अव्यवस्था और नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं।
दूसरी बार नोटिस की तैयारी…
एक्सपायरी खाद बेचने के मामले में कृषि विभाग अब कोठारी कृषि केंद्र को दूसरी बार नोटिस देने की तैयारी में है। सवाल यह उठता है कि जब पहले भी इस केंद्र में अनियमितताएं पाई गई थीं, तो उसके संचालन पर रोक क्यों नहीं लगाई गई? क्या विभाग की कार्रवाई महज औपचारिकता भर है?
किसानों की नाराजगी जायज..
एक्सपायरी नैनो यूरिया का उपयोग न केवल फसलों की पैदावार को प्रभावित करता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण पर भी इसका गंभीर असर हो सकता है। यही कारण है कि किसानों ने इस धोखाधड़ी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। मौके पर कृषि अधिकारी की मौजूदगी में यह सब होना, किसानों के विश्वास को तोड़ने वाला है। किसानों ने मांग की है कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
क्या है नैनो यूरिया?
नैनो यूरिया, पारंपरिक यूरिया का एक तरल और अत्याधुनिक विकल्प है जिसे नैनो टेक्नोलॉजी के माध्यम से विकसित किया गया है। यह पौधों को नाइट्रोजन उपलब्ध कराने का अधिक प्रभावी, पर्यावरण के अनुकूल और किफायती तरीका माना जाता है। इसे गुजरात स्थित नैनो बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर ने स्वदेशी तकनीक से तैयार किया है। हालांकि, इसका सही उपयोग और गुणवत्ता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, वरना यह लाभ की जगह नुकसान पहुंचा सकता है।
प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल..
यह पूरा मामला सिर्फ एक केंद्र की लापरवाही नहीं है, बल्कि यह एक बड़ी प्रशासनिक असफलता को उजागर करता है। जब जिम्मेदार अधिकारी की मौजूदगी में किसानों को एक्सपायरी खाद बेची जा रही हो, तो यह समझना मुश्किल नहीं कि व्यवस्था में कितनी गंभीर खामियां हैं।
निष्कर्ष:
कोठारी कृषि केंद्र में हुई यह घटना प्रशासन, कृषि विभाग और खाद वितरण तंत्र की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। यदि दोषियों पर शीघ्र और कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो यह घटनाएं किसानों की आस्था और कृषि तंत्र दोनों को नुकसान पहुंचाएंगी। जरूरत है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को दंडित किया जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हो, इसके लिए सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की जाए।









