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पुनर्वासित व्यक्तियों को मछली पालन से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम

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ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोंडागांव । शासन की पुनर्वास नीति के अंतर्गत आत्मसमर्पित एवं पुनर्वासित व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से जिले में लगातार आजीविका आधारित गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में कोंडागांव जिले में मछली पालन को स्वरोजगार का प्रभावी माध्यम बनाते हुए पुनर्वासित व्यक्तियों को लाभान्वित किया गया।

किसान मेले में मछली जाल का वितरण

बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं स्थानीय विधायक सुश्री लता उसेंडी के मुख्य आतिथ्य में आयोजित किसान मेले के दौरान जिले के 05 पुनर्वासित व्यक्तियों को मत्स्य पालन हेतु उन्नत प्रशिक्षण प्रदान कर मछली जाल वितरित किए गए। साथ ही जिले की 06 मत्स्य पालन सहकारी समितियों को भी जाल उपलब्ध कराए गए।

पुनर्वासित हितग्राहियों को मिला लाभ

मछली जाल प्राप्त करने वाले पुनर्वासित व्यक्तियों में—

  • श्री रजु सोरी (मुंगवाल)
  • श्री रजु कोर्राम (पराली)
  • श्री कोलसाल कावडे (कदई फरसगांव)
  • श्री सुखराम सलाम (बोकड़ा बेड़गांव)
  • श्री राजेश कुमार सलाम (पेरमापाल)
    शामिल हैं।

सहकारी समितियों को भी मिला प्रोत्साहन

कार्यक्रम के दौरान निम्नलिखित सहकारी समितियों को भी मत्स्य पालन के लिए मछली जाल वितरित किए गए—

  • मां लिंगेश्वरी बृहद महिला मत्स्य पालन सहकारी समिति, झाटीबेन फरसगांव
  • जय बुड़ादेव मत्स्य पालन सहकारी समिति, केरवाही माकड़ी
  • आदिवासी मत्स्य पालन सहकारी समिति, कड़ंगा फरसगांव
  • जय बुड़ादेव बृहद मत्स्य पालन सहकारी समिति, चिंगनार फरसगांव
  • जागृति बृहद मत्स्य पालन सहकारी समिति, भटवा माकड़ी
  • मत्स्य पालन सहकारी समिति, कमेला कोंडागांव

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम में कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीता शोरी, नगर पालिका अध्यक्ष श्री नरपति पटेल, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती यशोदा कश्यप, उपाध्यक्ष श्री जसकेतु उसेंडी, जिला पंचायत सीईओ श्री अविनाश भोई, अपर कलेक्टर श्री चित्रकांत चाली ठाकुर, एसडीएम श्री अजय उराव सहित जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

आत्मनिर्भरता की ओर एक सशक्त कदम

कार्यक्रम के माध्यम से पुनर्वासित व्यक्तियों और सहकारी समितियों को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में यह पहल एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

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