ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोण्डागांव । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य शासन की पुनर्वास नीति के तहत कोण्डागांव जिले में पुनर्वासित व्यक्तियों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रभावी पहल की जा रही है। जिले का पुनर्वास केन्द्र अब उन लोगों के लिए आशा और नवजीवन का केंद्र बन गया है, जिन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति और विकास का मार्ग अपनाया है।
कौशल प्रशिक्षण से बन रहे आत्मनिर्भर
जिले में वर्तमान में 48 पुनर्वासित व्यक्तियों को विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ देने के साथ-साथ कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। उन्हें उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार असिस्टेंट शटरिंग कारपेंटर, गार्डनर, वाहन मेकेनिक, इलेक्ट्रिशियन, सिलाई-कढ़ाई जैसे रोजगारोन्मुखी कार्यों में प्रशिक्षित किया जा रहा है।
पहले चरण में 38 को मिला प्रशिक्षण
प्रथम चरण में 38 व्यक्तियों को विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षित किया जा चुका है। वहीं वर्तमान में लाईवलीहुड कॉलेज में 10 पुनर्वासित व्यक्तियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिनमें 7 सिलाई और 3 इलेक्ट्रिशियन ट्रेड में प्रशिक्षण ले रहे हैं। यह प्रशिक्षण उन्हें तकनीकी दक्षता के साथ आत्मविश्वास भी प्रदान कर रहा है।
महिलाएं और युवा बना रहे नए सपने
मड़हो बाई कोर्राम और हाड़ोबाई सोडी जैसी महिलाएं पुनर्वास केंद्र में सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उनका कहना है कि प्रशिक्षण के बाद वे अपने गांव में स्वरोजगार शुरू करेंगी।
पूर्व उग्रवादियों में भी दिख रहा बदलाव
मोहन कोर्राम, जो वर्ष 2004 में माओवादी संगठन से जुड़े थे, अब पुनर्वास नीति के तहत सिलाई का प्रशिक्षण ले रहे हैं। उनका लक्ष्य है कि वे अपने गांव में स्वरोजगार स्थापित कर शांतिपूर्ण जीवन जी सकें।
शासन की योजनाओं से मिल रहा संबल
राज्य शासन द्वारा पुनर्वासित व्यक्तियों को प्रशिक्षण के साथ-साथ आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वरोजगार की सुविधाएं भी दी जा रही हैं। इन प्रयासों से उन्हें समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक पुनर्स्थापित किया जा रहा है।
सकारात्मक बदलाव की ओर बढ़ता कदम
पुनर्वास नीति और जनकल्याणकारी योजनाओं के समन्वय से कोण्डागांव जिले में पुनर्वासित लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है, जो उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बना रहा है।








