ब्यूरो नूतन साहू गरियाबंद। छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना अधिनियम, 1958 (गुमास्ता एक्ट) के नियमों का पालन गरियाबंद में लगातार कमजोर होता जा रहा है। रविवार को अवकाश दिवस घोषित होने के बावजूद बड़ी संख्या में दुकानें खुल रही हैं, जिससे श्रम कानूनों की खुली अनदेखी सामने आ रही है।
पहले कुछ दुकानों ने शुरू किया, अब बढ़ता जा रहा दायरा
सूत्रों के अनुसार, पहले रविवार को केवल अजंता बूट हाउस, लक्ष्मी बुक डिपो, बालाजी जनरल, मंगलम साड़ी सेंटर जैसी दुकानों ने अवकाश दिवस पर दुकानें खोलना शुरू किया। बाद में अन्य दुकानदारों ने भी दबाव महसूस करते हुए इसी पैटर्न को अपनाया और दुकानें खोलना शुरू कर दीं।
जहां किराना दुकानें नियमों के मुताबिक बंद हैं, वहीं अन्य दुकानें खुलने से बाजार का स्वरूप अव्यवस्थित हो रहा है।
बिना अनुमति दुकान खोल रहे व्यापारी
जानकारी के अनुसार अधिकांश व्यापारियों ने रविवार को दुकान खोलने के लिए श्रम विभाग से अनुमति नहीं ली है।
साप्ताहिक अवकाश, कर्मचारियों की सुरक्षा और कार्य समय से जुड़े प्रावधानों की अनदेखी करना गुमास्ता एक्ट का गंभीर उल्लंघन है।
सवाल उठ रहा है कि श्रम विभाग की चुप्पी आखिर क्यों?
कर्मचारियों की नाराजगी: “हफ्ते में एक दिन छुट्टी जरूरी है”
दुकानों में कार्यरत कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें सप्ताह में एक अनिवार्य छुट्टी मिलनी चाहिए।
लगातार सात दिन काम कराने से मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ रहा है।
कई कर्मचारी दावा करते हैं कि रविवार को भी काम करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
प्रशासनिक कार्रवाई नदारद, सख्ती की जरूरत
रविवार को बिना अनुमति दुकानें खुलने की शिकायतें जिला प्रशासन और श्रम विभाग को मिल रही हैं, लेकिन अभी तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई।
कर्मचारियों का कहना है कि यदि निरीक्षण और कार्रवाई शुरू हो जाए, तो साप्ताहिक अवकाश का उद्देश्य पूरा होगा और व्यापारी नियम का पालन करने के लिए बाध्य होंगे।
निष्कर्ष:
गरियाबंद में गुमास्ता एक्ट के नियम कागजों तक सीमित दिख रहे हैं। कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा और श्रम कानूनों के पालन के लिए तत्काल प्रशासनिक सख्ती की जरूरत है।








