ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोण्डागांव। कोण्डागांव।,छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित बस्तर के प्रसिद्ध लौह शिल्प कलाकार श्री तीजू राम विश्वकर्मा को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने पत्र के माध्यम से बस्तर की पारंपरिक लौह शिल्प कला के संरक्षण, संवर्धन और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए किए जा रहे उनके प्रयासों की सराहना की है।
पिता से सीखी कला को मेहनत और लगन से दिलाई नई पहचान
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि तीजू राम विश्वकर्मा ने अपने पिता से लौह शिल्प कला सीखी और वर्षों की मेहनत एवं लगन से इस पारंपरिक कला को आगे बढ़ाया। पिता के निधन के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए भी उन्होंने अपनी कला को जीवंत बनाए रखा। साथ ही अन्य कारीगरों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित किए।
इटली और रूस तक पहुंची बस्तर की लौह शिल्प कला
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री विश्वकर्मा ने अपनी कलाकृतियों के माध्यम से बस्तर की पारंपरिक लौह शिल्प कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। इटली और रूस में आयोजित प्रदर्शनियों में उनके कार्यों को प्रदर्शित किया जाना पूरे क्षेत्र के लिए गौरव की बात है। उन्हें राज्य स्तरीय सम्मान के साथ राष्ट्रपति के हाथों राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त होना छत्तीसगढ़ के लिए भी सम्मान का विषय है।
नई पीढ़ी को पारंपरिक कला से जोड़ने की पहल की सराहना
मुख्यमंत्री श्री साय ने युवाओं को लौह शिल्प कला का प्रशिक्षण देने और इस पारंपरिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के उनके प्रयासों की विशेष रूप से प्रशंसा की। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक कारीगरों को प्रोत्साहित करने में तीजू राम विश्वकर्मा जैसे कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
मुख्यमंत्री का पत्र पाकर कलाकार ने जताया आभार
मुख्यमंत्री का आत्मीयता और स्नेह से भरा पत्र प्राप्त होने पर श्री तीजू राम विश्वकर्मा ने प्रसन्नता व्यक्त की और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा उनकी कला और प्रयासों की सराहना किया जाना उनके लिए गौरव और प्रेरणा का विषय है।
उन्होंने कहा कि इस प्रोत्साहन से बस्तर की पारंपरिक लौह शिल्प कला के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए वे और अधिक उत्साह एवं समर्पण के साथ कार्य करेंगे।








