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Big breking News: नाबालिग बालिकाओं के जबरन धर्मांतरण के प्रयास मामले में अभियुक्तों की ज़मानत याचिका अदालत ने खारिज की

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दुर्ग! थाना जीआरपी दुर्ग में रवी निगम द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर तीन अभियुक्तों 

1. सुफियान मंसूरी,

2. वंदना प्रांसिंग पिता मैट्यू,

3. पुष्पम मंडल

खिलाफ नाबालिग लड़कियों को बहला-फुसलाकर जबरन ईसाई धर्म में धर्मांतरण कराने के प्रयास का गंभीर आरोप दर्ज किया गया था।

प्रकरण में यह उल्लेखनीय है कि तीनों आरोपी रेलवे स्टेशन दुर्ग पर तीन नाबालिग लड़कियों को ईसाई धर्म में दीक्षा दिलाने रायपुर ले जा रहे थे, जिन्हें पकड़कर पुलिस थाने लाया गया।

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस द्वारा आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 143 एवं छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 1968 की धारा 4 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया।

प्रमुख तथ्य:

न्यायालय ने अभियुक्तों की जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि यह अपराध गंभीर प्रकृति का है तथा इसमें आजन्म कारावास तक की सजा का प्रावधान है।

न्यायालय ने कहा कि यह अपराध गैर-जमानती (non-compoundable) श्रेणी का है, जिसमें पीड़ित या परिजनों की सहमति से समझौता संभव नहीं है।

अभिव्यक्ति में यह भी बताया गया कि अभियुक्तों द्वारा बालिकाओं पर दबाव बनाया गया तथा धार्मिक गतिविधियों के नाम पर उन्हें गुमराह कर रायपुर ले जाया जा रहा था।


न्यायिक निर्णय
माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्री द्विजेंद्र नाथ ठाकुर की अदालत ने 08 अगस्त 2025 को रिमांड पेसी देते हुए यह स्पष्ट किया कि वर्तमान परिस्थितियों में अभियुक्तों को जमानत का लाभ देना न्यायहित में नहीं होगा।

निष्कर्ष
यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता, बच्चों की सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द से जुड़ा हुआ है। ऐसे मामलों में प्रशासन की सतर्कता और न्यायपालिका की सख्ती समाज में स्पष्ट संदेश देती है कि धर्मांतरण जैसी गतिविधियों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मौखिक आपत्ति
प्रकाश शर्मा ,पुरुषोत्तम सोनारे ,उत्तम चौधरी ,नीरज सिंह राठौड़ अधिवक्ता

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