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बस्तर संस्कृति संरक्षण का संकल्प, तुतारी बेड़मा में सिद्धार्थ महाजन की प्रस्तुति

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ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोण्डागांवकेशकाल ,छत्तीसगढ़ एवं बस्तर की समृद्ध लोक संस्कृति को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से ग्राम तुतारी बेड़मा (फूल मड़ई) में एक भव्य एवं रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बस्तर संस्कृति लोकरंग ग्रुप, कोंडागांव द्वारा सिद्धार्थ महाजन के नेतृत्व में मनमोहक प्रस्तुति दी गई।

लोक नृत्य और गीतों से सजी रंगारंग प्रस्तुति

कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने पारंपरिक बस्तरिया एवं छत्तीसगढ़ी परिधानों में मंच पर सजीव लोक नृत्य एवं गीतों की प्रस्तुति दी। लोक संगीत की आत्मा को दर्शाते नृत्य-गीतों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। आसपास के ग्रामीण अंचलों से बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम देखने पहुंचे और देर तक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लेते रहे।

लुप्त होती लोक कला को मिला नया जीवन

ग्राम तुतारी बेड़मा की आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि बस्तर संस्कृति लोकरंग ग्रुप द्वारा छत्तीसगढ़ एवं बस्तर की लुप्त होती लोक कला, गीत और नृत्य को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। पारंपरिक संस्कृति की ऐसी प्रस्तुति देखकर दर्शक भावविभोर हो उठे।

हजारों मंचों पर कर चुके हैं प्रस्तुति

इस अवसर पर ग्राम तुतारी बेड़मा के आनंद नेताम ने जानकारी देते हुए बताया कि सिद्धार्थ महाजन एवं उनकी टीम अब तक हजारों मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन कर चुकी है। बस्तर और छत्तीसगढ़ी लोकगीतों के माध्यम से उन्होंने पूरे राज्य में एक अलग पहचान बनाई है।

उन्होंने कहा कि सिद्धार्थ महाजन अपने गीतों के माध्यम से बस्तर व छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराओं को निरंतर जीवंत बनाए हुए हैं।

लोक जागरूकता के लिए 10 हजार गांवों तक पहुंच

सिद्धार्थ महाजन ने केवल कला के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किए हैं।
जानकारी के अनुसार वे अब तक 10,000 से अधिक गांवों में जाकर—

  • स्वास्थ्य जागरूकता
  • कुपोषण उन्मूलन
  • शिक्षा का प्रचार
  • वनों को आग से बचाव
  • मलेरिया रोकथाम
  • पोषण अभियान
  • बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ
  • शासन की विभिन्न योजनाओं

का प्रचार-प्रसार कर जन-जन को जागरूक कर चुके हैं।

समाज सेवा में भी निभा रहे अहम भूमिका

सामाजिक सरोकारों के तहत सिद्धार्थ महाजन की टीम द्वारा गांव-गांव निशुल्क जूस वितरण, ब्लड डोनेशन जैसे कार्य भी लगातार किए जा रहे हैं, जो समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

45 से अधिक पुरस्कारों से हो चुके हैं सम्मानित

सिद्धार्थ महाजन को उनकी कला और समाज सेवा के लिए अब तक 45 से अधिक पुरस्कारों एवं सम्मानों से नवाजा जा चुका है। कम उम्र में इस तरह की उपलब्धियां हासिल करना अपने आप में एक बड़ी प्रेरणादायक उपलब्धि मानी जा रही है।

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