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खदान मालिक की तानाशाही से त्रस्त ग्रामीण और किसान – पानी की निकासी बाधित, फसलें बर्बाद, बस्ती पर मंडरा रहा खतरा…

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— संवाददाता, ग्रामीण विशेष रिपोर्ट, दुर्ग

दुर्ग (छत्तीसगढ़)। ग्राम गोडपेंड्री , पोस्ट सेलूद, तहसील पाटन के ग्रामीण एवं किसान इन दिनों भारी संकट से गुजर रहे हैं। गांव के समीप स्थित दम्मानी खदान के मालिक द्वारा विगत कुछ वर्षों से गांव की परंपरागत पानी निकासी व्यवस्था को जानबूझकर अवरुद्ध किया जा रहा है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान और बस्ती को गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है।

सदियों पुरानी निकासी व्यवस्था बाधित

ग्राम गोडपेंड्री के निषों खार और छाटा खार क्षेत्रों से वर्षा जल की सदियों पुरानी निकासी व्यवस्था दम्मानी खदान के पास से होकर गुजरती थी। यह जल निकासी खेतों से अतिरिक्त पानी को बाहर निकालती थी, जिससे फसलों को पानी में डूबने से बचाया जा सकता था। किंतु विगत वर्षों से दम्मानी खदान के मालिक द्वारा इस प्राकृतिक जल निकासी मार्ग को जबरन बंद कर दिया गया है।

किसानों के बार-बार आग्रह करने पर खदान मालिक पहले कभी-कभी रास्ता खोल दिया करता था, किंतु वर्ष 2024-25 में उनकी जिद्द और तानाशाही के चलते काफी देर से पानी निकासी की गई। तब तक बारिश के पानी ने खेतों में भयंकर तबाही मचा दी थी। कई किसानों की फसल पूरी तरह चौपट हो गई। प्रारंभ में 15% की क्षति हुई थी, लेकिन निकासी में देरी के कारण 75% से अधिक फसल पूरी तरह नष्ट हो गई।

2025-26 में पुनः बंद किया गया पानी निकासी मार्ग

इस वर्ष 2025-26 में भी खदान प्रबंधन द्वारा वही रवैया अपनाया गया है। पानी का निकासी मार्ग पुनः बंद कर दिया गया है, जिससे किसानों की खड़ी फसल फिर से जलमग्न होकर नष्ट हो रही है। किसान सहकारी बैंक से कर्ज लेकर खेती करते हैं। फसल बर्बाद होने पर कर्ज लौटाना मुश्किल हो जाता है, जिससे वे कर्ज के दलदल में फंसते जा रहे हैं।

पूरे गांव के सामने स्वास्थ्य संकट

यह केवल किसानों की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे ग्रामवासियों की चिंता बन चुकी है। जल निकासी न होने से गांव में गंदा पानी रुक जाता है जिससे मौसमी बीमारियों जैसे मलेरिया, डेंगू, त्वचा संक्रमण आदि फैलने की आशंका बनी रहती है। ग्रामवासी कई बार प्रशासन को इस विषय में अवगत करा चुके हैं लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

बस्ती पर मंडराता ब्लास्टिंग का खतरा

खदान गांव की बस्ती से सटी हुई है। खदान में ब्लास्टिंग के दौरान उड़ने वाले पत्थर कई बार बस्ती के घरों में गिर चुके हैं। इससे जान-माल का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। चिंताजनक बात यह है कि खदान प्रबंधन द्वारा ब्लास्टिंग से पूर्व कभी भी गांव वालों को कोई पूर्व सूचना नहीं दी जाती, जिससे ग्रामवासी हमेशा भय के माहौल में जीने को मजबूर हैं।

प्रशासन से न्याय की मांग

ग्रामवासियों ने मांग की है कि खदान मालिक की मनमानी और प्राकृतिक जल निकासी को रोकने की हरकत को तुरंत रोका जाए। साथ ही पिछले वर्ष हुए फसल नुकसान की भरपाई खदान मालिक से कराई जाए। किसानों ने प्रति एकड़ औसतन 30 क्विंटल फसल उत्पादन बताया है, जिसे 3100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से मुआवजा दिया जाना चाहिए।

इसके अतिरिक्त ग्रामवासियों ने मांग की है कि ब्लास्टिंग से पहले खदान प्रबंधन गांव को सूचना दे तथा सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करे। अगर खदान की गतिविधियों से गांव के नागरिकों को खतरा है तो तत्काल प्रभाव से खदान संचालन पर रोक लगाई जाए।

यह मामला केवल पर्यावरणीय और कृषक संकट का नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन पर सीधे प्रभाव डालने वाला सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संकट बन चुका है। ग्रामीणों और किसानों की आवाज को अब तक अनसुना किया गया है। शासन-प्रशासन से मांग है कि खदान मालिक की मनमानी पर अंकुश लगाकर ग्रामवासियों के जीवन और जीविका की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

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