ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोण्डागांव। रायपुर, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम के तहत प्रारूप मतदाता सूची में जिन नागरिकों का नाम शामिल नहीं है, वे अपना नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भर सकते हैं। भारत निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी करते हुए मतदाताओं की आशंकाओं को दूर किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि पूर्व में मतदाता सूची में पंजीकृत रहे नागरिक भी दोबारा फॉर्म-6 जमा कर सकते हैं। ऐसा करने पर उनके खिलाफ कोई दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
पहले से पंजीकृत मतदाताओं की दूर हुई परेशानी
विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान कई ऐसे मतदाता सामने आए हैं, जिनका नाम पहले मतदाता सूची में दर्ज था, लेकिन वर्तमान में प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में उनका नाम शामिल नहीं है। ऐसे मतदाता फॉर्म-6 भरने में असमंजस की स्थिति में थे।
दरअसल, फॉर्म-6 में आवेदक को यह घोषणा करनी होती है कि उसका नाम पहली बार मतदाता सूची में शामिल किया जा रहा है। ऐसे में पूर्व में पंजीकृत मतदाताओं को आशंका थी कि दोबारा आवेदन करने पर उनकी घोषणा गलत मानी जा सकती है और उन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
आयोग ने स्पष्ट किया, फॉर्म-6 भरना गलत घोषणा नहीं
भारत निर्वाचन आयोग ने इस मामले में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि यदि किसी नागरिक का नाम वर्तमान प्रारूप मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, तो अंतिम मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए उसे नए सिरे से फॉर्म-6 प्रस्तुत करना होगा।
आयोग ने साफ किया है कि आवेदक पूर्व में मतदाता के रूप में पंजीकृत रहा है, केवल इस आधार पर फॉर्म-6 भरने को गलत या झूठी घोषणा नहीं माना जाएगा।
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का दिया हवाला
आयोग का यह स्पष्टीकरण दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुरूप है। न्यायालय ने याचिका संख्या W.P. (C) No. 14955/2026 (निलोत्पल दत्ता व अन्य बनाम भारत निर्वाचन आयोग व अन्य) में 14 अक्टूबर 2026 को दिए गए आदेश में इस संबंध में स्थिति स्पष्ट की थी।
न्यायालय ने माना कि पूर्व में पंजीकृत मतदाता द्वारा वर्तमान प्रारूप सूची में नाम नहीं होने पर फॉर्म-6 जमा करने को गलत घोषणा मानने की आशंका निराधार है। ऐसे आवेदक नियमानुसार फॉर्म-6 प्रस्तुत कर सकते हैं।
फॉर्म-6 भरने पर धारा 31 के तहत नहीं होगी कार्रवाई
भारत निर्वाचन आयोग ने सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) को निर्देश दिए हैं कि केवल इस आधार पर किसी आवेदक के विरुद्ध लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कोई कार्रवाई नहीं की जाए कि उसका नाम पहले की किसी मतदाता सूची में दर्ज था।
हालांकि, आवेदक को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसका नाम किसी अन्य संसदीय या विधानसभा क्षेत्र की वर्तमान मतदाता सूची में पहले से पंजीकृत न हो तथा उसका आवेदन निर्धारित कानूनी नियमों के अनुरूप हो।
मतदाता सूची में नाम जांचने की नागरिकों से अपील
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, छत्तीसगढ़ ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में अपना नाम अवश्य जांचें। यदि किसी पात्र नागरिक का नाम सूची में नहीं है, तो वह बिना किसी संकोच के समय रहते फॉर्म-6 भरकर मतदाता सूची में अपना पंजीकरण सुनिश्चित कराएं।
आयोग के इस स्पष्टीकरण से उन पूर्व पंजीकृत मतदाताओं को राहत मिलेगी, जो कानूनी कार्रवाई की आशंका के चलते दोबारा पंजीकरण कराने में झिझक रहे थे।








