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चक्रवात के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में बढ़ेगी बारिश, बस्तर संभाग में भारी से बहुत भारी वर्षा का अनुमान

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26 से 29 अक्टूबर तक बारिश की संभावना, कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों को फसलों और पशुधन की सुरक्षा के लिए दी सलाह

ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोण्डागांव। कोण्डागांव, बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के चक्रवाती तूफान में बदलने की संभावना के बीच छत्तीसगढ़ में आगामी दिनों में वर्षा की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के आधार पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर ने 26 से 29 अक्टूबर तक प्रदेश के विभिन्न जिलों में बारिश की संभावना जताई है। विशेष रूप से बस्तर संभाग में भारी से बहुत भारी वर्षा होने का अनुमान है। इसे देखते हुए किसानों और पशुपालकों को सतर्क रहने तथा फसलों, कृषि उपज और पशुधन की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम करने की सलाह दी गई है।

बस्तर संभाग में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना

मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, 26 अक्टूबर को बस्तर संभाग के बस्तर, बीजापुर, कोण्डागांव, कांकेर और नारायणपुर जिलों में एक-दो स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा हो सकती है। इन क्षेत्रों में 64 से 115 मिलीमीटर तक भारी तथा 115 से 204 मिलीमीटर तक बहुत भारी वर्षा होने की संभावना जताई गई है।

इसके अलावा दुर्ग, बालोद, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, गरियाबंद, बिलासपुर, मुंगेली, बेमेतरा और कबीरधाम सहित प्रदेश के अन्य जिलों में भी कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है।

27 से 29 अक्टूबर तक भी बारिश के आसार

27 अक्टूबर को बस्तर, सुकमा और दंतेवाड़ा जिलों के अधिकांश स्थानों पर वर्षा होने की संभावना है। वहीं कोण्डागांव, कांकेर, नारायणपुर और बीजापुर सहित बस्तर संभाग के अन्य जिलों में भी कई स्थानों पर बारिश हो सकती है।

28 और 29 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिलों में वर्षा होने का पूर्वानुमान है। इस दौरान कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आगामी दिनों में रात के तापमान में वृद्धि होने और ठंड की संभावना कम रहने के आसार हैं।

धान, दलहन और तिलहन की कटाई फिलहाल टालने की सलाह

संभावित बारिश को देखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों को फसलों की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। विश्वविद्यालय के अनुसार, जिन खेतों में धान, दलहन और तिलहन की फसलें पकने की अवस्था में हैं, उनकी कटाई आगामी दो से चार दिनों तक टालना उचित होगा।

जिन किसानों ने पहले ही फसल की कटाई कर ली है, वे अपनी उपज को बारिश से बचाने के लिए ढके हुए और सुरक्षित स्थान पर रखें। साथ ही खेतों में जल निकासी की व्यवस्था तत्काल दुरुस्त करें, ताकि बारिश के कारण फसलों को नुकसान न हो।

रबी फसलों की बुवाई कुछ दिनों के लिए टालें

कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों को फसलों में कीट एवं रोग के प्रकोप पर लगातार निगरानी रखने की सलाह दी है। कीट या रोग दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद ही कीटनाशक और फफूंदनाशक का छिड़काव करें।

रबी मौसम में अलसी की बुवाई करने वाले किसान फिलहाल कुछ दिनों तक बुवाई स्थगित रखें। अन्य रबी फसलों और शीतकालीन सब्जियों की बुवाई नवंबर के प्रथम सप्ताह से करने की सलाह दी गई है।

केले और बेलवर्गीय सब्जियों को सुरक्षित रखें

बारिश और तेज हवाओं से बागवानी फसलों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। करेला, लौकी और अन्य बेलवर्गीय सब्जियों की बेलों को उचित सहारा दें। फूल और फल लगे केले के पौधों को बांस के सहारे बांधकर सुरक्षित करें।

इसके अलावा बागवानी और सब्जी फसलों को ओलावृष्टि से बचाने के लिए उपलब्धता के अनुसार ओला-रोधी जाल का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

पशुधन की सुरक्षा पर भी दें विशेष ध्यान

संभावित बारिश और खराब मौसम के दौरान पशुओं की सुरक्षा भी जरूरी है। पशुपालक अपने पशुओं को सूखे और सुरक्षित स्थान पर रखें। गरज-चमक के दौरान पशुओं को पेड़ों के नीचे न बांधें। उनके लिए पर्याप्त चारे और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

किसानों और पशुपालकों से सतर्क रहने की अपील

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने संभावित वर्षा को ध्यान में रखते हुए किसानों और पशुपालकों से समय रहते आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है। फसलों की कटाई, कृषि उपज के भंडारण, खेतों में जल निकासी और पशुधन की सुरक्षा के लिए उचित इंतजाम करने से मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों में होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।

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