ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोण्डागांव । मुखबिर से प्राप्त सूचना के आधार पर वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वन्यप्राणी शिकार के एक मामले का खुलासा किया। मामले में संलिप्त आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
मकान की तलाशी में मिला संदिग्ध मांस
वन विभाग के दल ने बाजारपारा निवासी उषा बाई रजक के मकान की तलाशी ली। तलाशी के दौरान 8 प्लास्टिक की थैलियों में रखा मांस बरामद हुआ। मौके पर मौजूद संगीता निर्मलकर एवं उषा बाई से पूछताछ की गई।
सांभर का मांस होने की पुष्टि
पूछताछ में दोनों महिलाओं ने स्वीकार किया कि बरामद मांस वन्यप्राणी सांभर का है। उन्होंने बताया कि मांस ग्राम उरपुटी, जिला धमतरी निवासी नरसु पिता पिलारू से खाने और बेचने के उद्देश्य से खरीदा गया था।
न्यायालय ने भेजा जेल
वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने पर दोनों आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया। न्यायालय में प्रस्तुत करने के पश्चात उन्हें 14 दिन के न्यायिक रिमांड पर जगदलपुर जेल भेजा गया।
धमतरी में दबिश, मुख्य आरोपी गिरफ्तार
दोनों आरोपियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर वनमण्डलाधिकारी श्री चूडामणी सिंह के निर्देश पर एक विशेष दल धमतरी रवाना किया गया। ग्राम उरपुटी में नरसु के निवास पर दबिश दी गई, जहां उसने सांभर के शिकार में अपनी संलिप्तता स्वीकार की।
शिकार में चार साथियों की भूमिका उजागर
नरसु ने बताया कि सांभर का शिकार उसके चार साथियों के साथ मिलकर किया गया। उसने यह भी स्वीकार किया कि 20 फरवरी 2026 को शाम के समय मांस बेचा गया था।
अनुपयोगी अवशेष जलाए गए
वन विभाग के अनुसार, सांभर के शरीर के अनुपयोगी भागों को धमतरी वनमण्डल के आरक्षित वन कक्ष क्रमांक आर.एफ. 178 में जला दिया गया था।
पांच आरोपी गिरफ्तार
प्राप्त तथ्यों के आधार पर नरसु पिता पिलारू, मुकेश पिता पिलारू, दुलेश्वर पिता धनीराम, तुलसी पिता भानसिंग तथा मैतु पिता मंगलु को गिरफ्तार कर कोण्डागांव लाया गया। सभी आरोपियों को 23 फरवरी 2026 को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
पुलिस विभाग का सराहनीय सहयोग
पूरी कार्रवाई में कोण्डागांव पुलिस विभाग का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। वनमंडलाधिकारी द्वारा पुलिस विभाग के प्रति विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया गया।








