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सरकारी दावों के बीच हकीकत: जीवन यापन के लिए बांस बर्तन बनाने मजबूर कमार जनजाति

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गरियाबंद पितृश्वर हरपाल।गरियाबंद जिले के आदिवासी अंचल मैनपुर विकासखंड में बड़ी संख्या में विशेष पिछड़ी कमार जनजाति के लोग निवास करते हैं। इनके जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए राज्य और केंद्र सरकार की ओर से कमार अभिकरण की स्थापना कर कई योजनाएं संचालित किए जाने का दावा किया जाता है।

लेकिन हकीकत इससे जुदा है। मैनपुर क्षेत्र के कमार जनजाति के लोगों तक इन योजनाओं का लाभ अपेक्षित रूप से नहीं पहुंच पा रहा है। परिणामस्वरूप आज भी यह जनजाति परिवार अपने जीवन यापन के लिए बांस से बर्तन तैयार कर स्थानीय साप्ताहिक बाजारों में बेचने को मजबूर हैं।

हमारे संवाददाता पितेश्वर हरपाल ने जब ग्राम छिंदौला, सिहार और लूठापारा का दौरा किया, तो वहां कमार जनजाति परिवारों की सच्चाई कैमरे में कैद हुई जहां महिलाएं और पुरुष पारंपरिक तरीके से बांस बर्तन बनाकर गुजर-बसर करते नजर आए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सरकार की योजनाओं का लाभ सही ढंग से इन तक पहुंचे, तो यह समुदाय भी मुख्यधारा के साथ जुड़कर बेहतर जीवन जी सकता है।

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