गोड़ पेंड्री दुर्ग, छत्तीसगढ़।
सरस्वती की साधना में जीवन समर्पित करने वाले, विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखने वाले, और शिक्षक धर्म को जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य मानने वाले टिकरीहा सर को उनके सेवाकाल की समाप्ति के उपलक्ष्य में ग्राम पंचायत गोड़ पेंड्री में एक भव्य विदाई समारोह का आयोजन किया गया।
समारोह में गांव के जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, पालकों और विद्यार्थियों ने भावुक होकर विदाई दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम सरपंच तोरण लाल साहू ने की। उप सरपंच रामनाथ गायकवाड (पप्पू), पंच ताराचंद, हरिवंश, पालक समिति अध्यक्ष रोशन लाल यदु, अशोक वर्मा एवं चंद्रिका प्रसाद कश्यप समेत अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। सभी ने टिकरीहा सर के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने न सिर्फ विद्यार्थियों को पढ़ाया बल्कि उनके जीवन निर्माण में मार्गदर्शक की भूमिका निभाई।
जीवन परिचय:
टिकरीहा सर का जन्म 15 जून 1962 को सिलघट, जिला बेमेतरा में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा से लेकर हायर सेकेंडरी तक की पढ़ाई गांव में ही की। उच्च शिक्षा के लिए साइंस कॉलेज, दुर्ग गए और वहीं से एमएससी की डिग्री प्राप्त की। शिक्षा के प्रति जुनून उन्हें कल्याण कॉलेज, भिलाई ले गया, जहां से उन्होंने बी.एड. की डिग्री प्राप्त की। कॉलेज के ही अध्यापन काल में उन्हें व्याख्याता पद के लिए चयनित किया गया और 2 दिसंबर 1985 को औपचारिक रूप से शिक्षा क्षेत्र में अपनी सेवा की शुरुआत की।
शिक्षक बनने की प्रेरणा:
टिकरीहा सर के पिता स्वयं एक शिक्षक थे। पिता की प्रेरणा और शिक्षा जगत की गरिमा ने उन्हें भी इस पवित्र पेशे की ओर प्रेरित किया। सर मानते हैं कि शिक्षा विभाग के विभिन्न अवकाश शिक्षक को न केवल मानसिक शांति देते हैं, बल्कि उन्हें पारिवारिक व सामाजिक दायित्वों को भी निभाने का पर्याप्त समय देते हैं। वे सदैव यह मानते रहे कि यदि शिक्षक का कार्य निष्ठापूर्वक हो, तो वह विद्यार्थियों की सोच, चरित्र और भविष्य को आकार दे सकता है।
दृढ़ अनुशासन और प्रेम से सजी शिक्षण पद्धति:
टिकरीहा सर की शिक्षण शैली अनुशासन और स्नेह का समुचित संतुलन थी। वे समय-समय पर विद्यार्थियों की काउंसलिंग करते थे, उनकी क्षमताओं को पहचान कर मार्गदर्शन देते थे। परिणामस्वरूप उनके छात्र न केवल जिले में टॉप करते रहे, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सफल होते रहे।
विदाई में छलके भाव:
विदाई समारोह में बोलते हुए कई शिक्षकों और पालकों ने साझा किया कि सर जैसे गुरु का विद्यालय से जाना केवल एक पद से निवृत्ति नहीं, बल्कि एक युग का अंत है। उन्होंने विद्यार्थियों के भीतर आत्मविश्वास, नैतिकता और समाज के प्रति जिम्मेदारी जैसे गुणों का संचार किया।
गांव के सरपंच तोरण लाल साहू ने कहा, “टिकरीहा सर ने हमारे गांव के शिक्षा स्तर को ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उनके मार्गदर्शन में गांव के बच्चों ने जिले में टॉप कर हमारा मान बढ़ाया है।
विदाई समारोह में विद्यार्थियों ने भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर अपने प्रिय गुरुजी को विदाई दी। कई बच्चों ने मंच पर आकर अपने अनुभव साझा किए और कहा कि टिकरीहा सर उनके लिए एक प्रेरणा हैं।
अंत में:
शिक्षक केवल ज्ञान नहीं देते, वे एक पीढ़ी को दिशा देते हैं। टिकरीहा सर का यह सेवायात्रा समाज के लिए एक उदाहरण है कि कैसे एक समर्पित शिक्षक अपने कार्य से समाज की दिशा बदल सकता है। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
—
यह विदाई न केवल एक शिक्षक को सम्मानित करने का अवसर था, बल्कि पूरे गांव की ओर से उन्हें धन्यवाद कहने का माध्यम भी था। टिकरीहा सर को उनके आगामी जीवन के लिए शुभकामनाएं देते हुए हर किसी की आंखों में भावुकता साफ झलक रही थी।









