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महिला समूह ने भक्ति और नारी शक्ति का सजाया सावन मंच

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भिलाई! सावन की हरियाली में भक्ति, समर्पण और महिला शक्ति की बयार – नीलू सिंह महिला स्व सहायता समूह ने रचा अनुकरणीय आयोजन


पहले सावन सोमवार पर भजन-कीर्तन और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों से गूंज उठा माहौल, महिला सशक्तिकरण की बनी मिसाल



सावन का पहला सोमवार इस बार खास बन गया जब नीलू सिंह महिला स्व सहायता समूह ने पूरे श्रद्धा, समर्पण और उत्साह के साथ भगवान शिव की आराधना करते हुए एक भव्य आयोजन का सफलतापूर्वक संचालन किया। भक्ति और संस्कृति का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला कि उपस्थित लोग मंत्रमुग्ध हो गए। भजन-कीर्तन, नृत्य, पारंपरिक वेशभूषा और समूह की एकता – सब कुछ इस कार्यक्रम को विशेष और प्रेरणादायी बना गया।

सुबह भगवान शिव के जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। महिलाएं पारंपरिक परिधान में सज-धज कर शामिल हुईं और “ॐ नमः शिवाय”, “हर हर महादेव” के जयघोष से वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। भजन मंडली द्वारा प्रस्तुत “भोले शंकर की जय”, “कांवड़ लाया बम-बम भोले” जैसे मधुर भजनों ने लोगों को भक्ति में डुबो दिया।

नेतृत्व और संगठन का उत्कृष्ट उदाहरण
इस कार्यक्रम की सबसे विशेष बात यह रही कि इसमें न कोई सरकारी सहायता थी, न कोई बाहरी संसाधन। सब कुछ महिलाओं ने स्वयं अपने सामर्थ्य, सहयोग और समर्पण से किया। श्रीमती नीलू सिंह ने कहा,

“हम महिलाओं ने आज ये साबित कर दिया कि अगर हम साथ हों तो सिर्फ घर ही नहीं, समाज में भी बदलाव ला सकती हैं। सावन सोमवार हमारे लिए आस्था का पर्व है, लेकिन इसे हमने महिला एकता और सृजन का पर्व बना दिया है।”



सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
भक्ति कार्यक्रम के उपरांत आयोजित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम में महिलाओं और बालिकाओं ने शिव भक्ति से जुड़े नृत्य और लोक गीतों की शानदार प्रस्तुति दी। पारंपरिक “झूला” उत्सव और मेहंदी प्रतियोगिता ने सावन के सौंदर्य को और भी जीवंत कर दिया। छोटे-छोटे बच्चों द्वारा प्रस्तुत ‘शिव तांडव’ नृत्य ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।

सामाजिक संदेश के साथ आयोजन
कार्यक्रम केवल धार्मिक नहीं था, इसमें सामाजिक चेतना का भी समावेश किया गया। समूह ने सामूहिक रूप से “एक पौधा एक जीवन” अभियान की शुरुआत की और प्रत्येक महिला ने सावन के इस पवित्र दिन पर पौधारोपण का संकल्प लिया। इसके अलावा स्वच्छता, शिक्षा और महिला स्वरोजगार जैसे विषयों पर भी जागरूकता फैलाई गई।

समाज में प्रेरणा का स्रोत
इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब महिलाएं संगठित होती हैं, तो वे सिर्फ भजन-कीर्तन ही नहीं, समाज को नई दिशा देने वाले कार्यों में भी अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं। नीलू महिला स्व सहायता समूह अब केवल एक संगठन नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की एक जीवंत मिसाल बन गया है।

स्थानीय नागरिकों और अतिथियों ने की सराहना
आयोजन में सम्मिलित स्थानीय जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और ग्रामीणजनों ने समूह के इस प्रयास की मुक्तकंठ से सराहना की। सभी ने कहा कि यह कार्यक्रम सिर्फ पूजा-पाठ नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और संस्कृति की रक्षा का सार्थक प्रयास है।


यह सावन सोमवार सिर्फ शिवभक्ति का पर्व नहीं रहा, बल्कि यह एक चेतना का संदेश बनकर उभरा – जिसमें महिला शक्ति, संगठन, संस्कृति और समाजसेवा का अद्भुत समन्वय था।
नीलू सिंह महिला स्व सहायता समूह का यह प्रयास आने वाले समय में अनेक अन्य समूहों और समाज को भी प्रेरणा देगा।

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