कोण्डागांव से बन्नूराम यादव की रिपोर्ट
कोंडागांव ! ‘‘बस्तर पंडुम’’ अंतर्गत आज विकासखंड स्तरीय कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ हुआ। जनपद पंचायत कोंडागांव के स्थानीय ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं समाज के प्रबुद्धजनों की उपस्थिति रही। तीन दिवसीय इस आयोजन के पहले दिन लोक कलाकारों द्वारा पारंपरिक जनजातीय नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दी गईं। इसके साथ ही जनजातीय वेशभूषा और आभूषणों की विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की गई।
कार्यक्रम में 23 दलों की पारंपरिक एवं जनजातीय लोकनृत्यों की आकर्षक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके अंतर्गत लोक कलाकारों ने मादरी नृत्य, गेड़ी नृत्य, गौर नृत्य सहित विभिन्न लोकनृत्यों की प्रस्तुती दी। जनजातीय वेशभूषा के प्रदर्शन में 08 दलों ने परंपरागत वेशभूषा के साथ आभूषणों के नाम जैसे सुता, बंधा, कौड़ी गजरा, कौड़ी माला, पुतरी, करधन, बाहुटा, ढार, लुरकी, ऐठी, मुंदरी, फूली, पटा, बिछिया सहित अन्य आभूषण की विस्तृत जानकारी प्रतिभागियों के द्वारा दी गई।
इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीता शोरी, नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष श्री नरपति पटेल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में हुई।इस आयोजन के माध्यम से युवाओं को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को करीब से देखने और समझने का अवसर मिल रहा है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उत्साह के साथ दोनों श्रेणियों में प्रतिभागियों ने भाग लिया। जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण वर्ग में भाग लेने वाली प्रतिभागी पोस्ट मैट्रिक छात्रावास की छात्रा मनिता नेताम ने राज्य शासन को इस आयोजन के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि ‘‘बस्तर पंडुम’’ न केवल लोक संस्कृति को संरक्षित करने में कारगर साबित होगा, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध परंपराओं से जोड़ने का भी महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।
यह आयोजन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने और इसे आगे बढ़ाने के लिए भी प्रेरित कर रहा है।इस अवसर पर नगर पालिका परिषद के उपाध्यक्ष श्री जसकेतू उसेण्डी जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अनिता कोर्राम, उपाध्यक्ष श्री टोमेन्द्र सिंह ठाकुर सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, समाज प्रमुख एवं प्रबृद्धजन उपस्थित थे। बस्तर पंडुम के विकासखण्ड स्तरीय कार्यक्रम के दूसरे दिन 18 मार्च 2025 को जनजातीय गीत और जनजातीय वाद्ययंत्रों का प्रदर्शन किया जाएगा और तीसरे दिन 19 मार्च को जनजातीय नाट्य, जनजातीय शिल्प एवं चित्रकला का प्रदर्शन, जनजातीय पेय पदार्थ एवं व्यंजन का प्रदर्शन किया जाएगा।








