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फुटकर व्यापारियों की भूख हड़ताल शुरू, नगर पालिका की तानाशाही के खिलाफ एकजुट विरोध

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गरियाबंद से नूतन साहू की रिपोर्ट

गरियाबंद !  गरियाबंद नगर पालिका के कथित दबाव और अनुचित बाजार व्यवस्थापन के विरोध में स्थानीय फुटकर व्यापारियों ने रविवार से गांधी मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। सभी 75 फुटकर व्यापारी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हैं, जिनमें महिलाओं की भी सक्रिय भागीदारी देखी जा रही है।

भूख हड़ताल के पहले ही दिन दो महिला व्यापारियों की तबीयत अचानक बिगड़ने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम एम्बुलेंस लेकर मौके पर पहुंची और तत्काल उपचार प्रारंभ किया गया। प्रशासनिक सतर्कता के तहत गरियाबंद पुलिस बल भी मौके पर मौजूद रहा।

व्यापारियों का आरोप है कि नगर पालिका बरसात के इस भीषण मौसम में उन्हें उनके व्यापारिक स्थलों से जबरन हटाने का प्रयास कर रही है, जो न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि संविधान प्रदत्त अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि एक ओर शासन-प्रशासन बरसात के नुकसान की भरपाई के लिए राहत योजनाएं चलाता है, वहीं नगर पालिका ऐसी कार्रवाई कर रही है जिससे गरीब व्यापारियों की रोज़ी-रोटी ही छिन जाए।

व्यापारियों की प्रमुख मांग है कि वर्तमान बाजार व्यवस्था यथावत रखी जाए और उन्हें बेदखल न किया जाए। उनका कहना है कि नगर पालिका को थोड़ी संवेदनशीलता दिखाते हुए व्यापारियों की समस्याएं सुननी चाहिए, उन्हें कुछ समय की मोहलत देनी चाहिए और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए।

इस आंदोलन को आम जनता, समाजसेवी संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों से भी समर्थन मिल रहा है। कई जनप्रतिनिधि धरना स्थल पर पहुंचकर व्यापारियों के साथ एकजुटता दिखा चुके हैं। उन्होंने भी नगर पालिका के रवैये को अनुचित बताते हुए व्यापारियों की मांग को जायज़ ठहराया है।

धरना स्थल पर गूंजते नारों ने आंदोलन को और धार दी:

“मज़दूर एकता ज़िंदाबाद, फुटकर व्यापारी ज़िंदाबाद”

“हम अपना अधिकार मानते, नहीं किसी से भीख मांगते”

“नगर पालिका तानाशाही नहीं चलेगी, नहीं चलेगी”

“हर जोर-जुल्म की टक्कर में संघर्ष हमारा नारा है”

“अभी तो ये अंगड़ाई है, आगे और लड़ाई है”


व्यापारियों का यह संगठित प्रयास न केवल उनके अधिकारों की रक्षा का प्रतीक है, बल्कि स्थानीय प्रशासन के रवैये के खिलाफ एक चेतावनी भी है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की आवाज को अनसुना नहीं किया जा सकता।

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