गरियाबंद से नूतन साहू की रिपोर्ट
गरियाबंद से एक चौंकाने वाली लेकिन मजेदार खबर सामने आई है, जिसमें पेंशन के नाम पर दो सरकारी बाबूओं ने मिलकर 4 लाख 80 हजार की चतुराई कर डाली—पर पुलिसिया दिमाग के आगे सब ढेर हो गए!
बड़े बाबू, बड़ी बात—पर पकड़े गए साफ!
पूरा मामला कुछ यूँ है:
ग्राम पतोरा की बिशाखा बाई, जिनके पति स्वर्गीय गेसनारायण दीवान 2021 में स्वर्ग सिधार गए थे, पेंशन के लिए फिंगेश्वर बी.ओ. ऑफिस पहुँचीं। वहां के “बड़े बाबू” मोहम्मद मजहर खान ने कहा – “पेंशन बनेगी, पर पैसे लगेंगे!”
और फिर शुरू हुई चेकबुक की चालबाज़ी। बिशाखा बाई से हस्ताक्षर करवा कर बाबूजी और उनके साथी खोरबाहरा राम ध्रुव ने मिलकर 2,80,000 रुपये उड़ा लिए।
सीन पार्ट 2: पैसा दो,
पेंशन लो – स्कीम नंबर 2
इसी कड़ी में एक और महिला, ग्राम अकलवारा से, पेंशन के चक्कर में बाबू जी के पास पहुँचीं। इस बार तो घर आकर 2 लाख रुपये नगद ही ले गए दोनों घाघ कलाकार।
अब असली पिक्चर शुरू होती है – गरियाबंद पुलिस की एंट्री!
थाना फिंगेश्वर की टीम को जैसे ही शिकायत मिली, उन्होंने बिना समय गँवाए दोनों कलाकारों –
1. मोहम्मद मजहर बेग (उर्फ़ ‘चेक मैन’) – उम्र 37 साल, गोबरा नवापारा
2. खोरबाहरा राम ध्रुव (उर्फ़ ‘कैश कलेक्टर’) – उम्र 49 साल, फिंगेशचलेग को दबोच लिया।
पुलिस पूछताछ में निकली सच्चाई – जुर्म कबूल!
पुलिस ने जब सवालों की झड़ी लगाई तो दोनों ने कबूल लिया कि उन्होंने ये “पेंशन प्लान” खुद का ही बनाया था – लेकिन कानून से नहीं बच पाए।
इन पर लगा है बीएनएस एक्ट की धारा 381(4), 61(2), और 3(5)
यानि चोरी, धोखाधड़ी और विश्वासघात की सारी परतें खोल दी गईं!
अब जनता पूछ रही है: बाबूजी, ये कौन-सी स्कीम थी!?
लोग हँस भी रहे हैं और सोच भी रहे हैं – अगर पेंशन के लिए इतना “इन्वेस्टमेंट” करना पड़े, तो फिर बचत कहां रही?
थाना प्रभारी और गरियाबंद पुलिस को मिल रही वाहवाही
दोनों आरोपियों की तेज़ी से गिरफ्तारी कर पुलिस ने ये साबित कर दिया कि चाहे स्कीम कितनी भी शातिर हो, गरियाबंद में जुर्म नहीं चलेगा!
सीख क्या मिलती है?
अगर कोई बाबू पेंशन के नाम पर चेक साइन कराए या कैश मांगे—तो समझ जाइए, वो ‘बाबू नहीं, बाबू-भोले’ हैं। तुरंत पुलिस को सूचना दें, वरना आपकी पेंशन कहीं और ट्रांसफर हो जाएगी!
अंत में एक लाइन:
“पेंशन में टेंशन डालने वालों की अब खैर नहीं!”
गरियाबंद पुलिस: सजग भी, सतर्क भी – और चतुर बाबुओं के लिए ‘डर’ भी!








