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पत्रकारों को रेत माफियाओं द्वारा किए गए हत्या का प्रयास करने वाले आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग संयुक्त पत्रकार साथियों के द्वारा।

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गरियाबंद ! जिला कलेक्टर कार्यालय में जिले के सभी पदाधिकारी पत्रकार पिताईबंद  में अवैध उत्खनन करने वाले रेत माफियाओं का पर्दाफाश करने व  कवरेज करने पत्रकार पर हुवे हमले पर उचित कार्यवाही करने सभी पत्रकार बंधु धरना प्रदर्शन कर एस. पी. कार्यालय और जिला कलेक्टर महोदय के समक्ष ज्ञापन सौंपे।


पत्रकारों पर हुवे हमला में उचित कार्यवाही के साथ – साथ जिले में संचालित अवैध रेत खदानो को बंद करने बाबत ।
दिनांक 09 जून 2025 में जिले के पीताईबंद में स्थित अवैध रेत खदान संचालित है जिसे कव्यरेज करने गए पत्रकारों पर संचालकों के इशारे पर उनके गुंडे द्वारा हत्या का प्रयास किया गया। किंतु घटना के 24 घंटे के बाद भी मामले में उचित कार्यवाही नहीं की गई है। निम्नलिखित मांग पर आवश्यक कार्यवाही करने की मांग की है ।


पत्रकारों के हमला करने के आरोपियों के विरुद्ध हत्या के मामला दर्ज किया जाए । अवैध खदान संचालक जिसके इशारे पर हमला हुआ उसे भी आरोपि बनाया जाए । खनिज अधिकारी रोहित साहू को हटाया जाए । जिले में समस्त अवैध रेत खदानो को तत्काल बंद कराने वहां बनाए गए अस्थाई स्ट्रक्चरो को तोड़ा जाए ताकि खदान दोबारा संचालित ना हो सके। जितने भी खदान में अवैध खनन हुआ है उसका आंकलन कर संबंधीत दोषियों के खिलाफ विधिवत माइनिंग एक्ट के तहत किया जाए।


उक्त मांगों पर 07 दिवस के भीतर कार्यवाही नहीं करने की स्थिति में पत्रकारों द्वारा शासकीय खबरों और जिला प्रशासन आयोजित प्रेस वार्ता/विज्ञप्ति का बहिष्कार कर सुनियोजित धरना प्रदर्शन किया जाएगा जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।


पत्रकार आज सुरक्षित नहीं है कारण यह की शासन प्रशासन कानून पुलिस पत्रकारों को मजाक समझने लगे है ये लोग तो कलम चलाते है हथियार नहीं वो इसीलिए की पत्रकार संविधान के नियमों का पालन करते है। हमारी कलम जिस दिन बंद हो जाएगी उस दिन इस देश की खबर विलुप्त हो जाएगी। लाइव टेलीकास्ट अगर संचालित नहीं होगी तो सरकार की योजनाएं विफल और नाकारा हो जाएगा। लोगों की समझ से परे ये हिंदुस्तान रह जाएगा, ना ही सरकार का जनता से और ना ही जनता का सरकार से मध्यस्था बनेगी। खासकरके पुलिस प्रशासनिक जो की आम जनता से लेकर खास नेता की ताकत होती है वो अपना कार्य ठीक ढंग से कार्य करना में असमर्थ है पत्रकारों का तो सुनने के लिए तैयार हो नहीं रहते आरोप प्रत्यारोप में उलझा कर रख देते है। सही दिशा सच झूठ का फैसला अपने तौर तरीके से करते है केवल आश्वासन ही मेन है फरियादी को गुनाहों के कटघरे में रख देते है।

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