खैरागढ़ से रवि गहने की रिपोर्ट
खैरागढ़ !छत्तीसगढ़ में पंचायत सचिवों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से ग्राम पंचायतों का प्रशासनिक कार्य ठप हो गया है। नवनिर्वाचित सरपंचों को विकास कार्यों को शुरू करने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम पंचायत बफरा की सरपंच सरोजनी लहरे ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह हड़ताल पंचायत व्यवस्था को बाधित कर रही है, जिससे ग्रामीण विकास योजनाएं ठप हो गई हैं। इस कड़ी में भीषण गर्मी के कारण बढ़ते पेयजल संकट ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
पेयजल संकट और प्रशासनिक ठहराव से ग्रामीणों की परेशानी
सरोजनी लहरे ने कहा, “इन दिनों भीषण गर्मी के कारण बफरा समेत कई गांवों में जल संकट गहराता जा रहा है। कई हैंडपंप और बोर सूख चुके हैं, जिससे ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में पंचायत सचिवों की हड़ताल ने समस्या को और जटिल बना दिया है, क्योंकि जल आपूर्ति योजनाओं के संचालन में भी बाधा आ रही है।”
उन्होंने कहा कि नल-जल योजना, टैंकर आपूर्ति और अन्य पेयजल प्रबंधन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक हस्तक्षेप जरूरी है, लेकिन पंचायत सचिवों के न होने से इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा पा रहा है।
विकास कार्य ठप, ग्रामीणों को असुविधा
सरोजनी लहरे ने आगे कहा कि पंचायतों में प्रस्ताव पारित करने, फंड जारी करने और विकास कार्यों की स्वीकृति जैसे महत्वपूर्ण कार्य पंचायत सचिवों के माध्यम से होते हैं। उनकी अनुपस्थिति में मनरेगा, वृद्धा पेंशन, शौचालय निर्माण, सड़क निर्माण और अन्य ग्रामीण विकास योजनाएं ठप्प पड़ी हैं।
उन्होंने कहा, “नए सरपंचों के लिए यह बहुत कठिन समय है। जनता ने हमें विकास के लिए चुना है, लेकिन प्रशासनिक तंत्र के ठप हो जाने से हम कोई ठोस कार्यवाही नहीं कर पा रहे हैं।”*
सरकार से समाधान की अपील
सरोजनी लहरे ने पत्रकार के माध्यम से राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह इस संकट का शीघ्र समाधान निकाले ताकि ग्राम पंचायतों में रुके हुए कार्य फिर से शुरू हो सकें। उन्होंने कहा कि सरकार को पंचायत सचिवों की मांगों पर उचित निर्णय लेना चाहिए, लेकिन यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि जनता को इस गतिरोध का खामियाजा न भुगतना पड़े।
उन्होंने आगे कहा, “पेयजल जैसी बुनियादी आवश्यकताओं से जुड़े मुद्दों को तत्काल हल करने की जरूरत है। ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पंचायतों को पूरी क्षमता से कार्य करने देना चाहिए। सरकार और पंचायत सचिवों को जल्द से जल्द इस गतिरोध को खत्म करने के लिए आपसी संवाद करना चाहिए।”
ग्राम पंचायतों के विकास पर प्रभाव
यदि यह हड़ताल लंबे समय तक जारी रही, तो पंचायत स्तर पर कई महत्वपूर्ण योजनाओं का क्रियान्वयन रुक जाएगा, जिससे ग्रामीणों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। विशेष रूप से गर्मी के मौसम में जल संकट और प्रशासनिक अव्यवस्था का एक साथ आना गांववासियों के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन गया है।
पंचायत सचिवों की अनिश्चितकालीन हड़ताल और भीषण गर्मी में पेयजल संकट ने बढ़ाई नवनिर्वाचित सरपंचों की मुश्किलें – सरोजनी लहरे








