अंकित टाटिया, दल्ली-राजहरा।नगर के भीतर आवारा पशुओं का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। बैल, गाय और कुत्तों की सड़कों पर बेधड़क आवाजाही और लड़ाई-झगड़े आम जनता के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। पिछले एक महीने में ऐसी घटनाओं की संख्या दर्जन भर से अधिक हो चुकी है, जिनमें अब तक दो युवकों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, वहीं दर्जनों लोग गंभीर चोटों से जूझ रहे हैं। इसी कड़ी में ताज़ा घटना दल्ली-राजहरा के गणेश पंडाल के सामने घटी, जहां तीन बैल और गायों की आपसी लड़ाई में मासूम बच्चे समेत कई लोग घायल हो गए।
15 दिन पहले बैलों की लड़ाई में गई थी दो युवकों की जान..
करीब पंद्रह दिन पूर्व नगर के एक्सिस बैंक के सामने दो बैलों की लड़ाई के दौरान 2 युवक उनकी चपेट में आ गए थे। घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान दोनों की मृत्यु हो गई। यह हादसा नगर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाता है। उस समय भी लोगों ने नगर पालिका और प्रशासन को चेताया था कि यदि आवारा पशुओं पर नियंत्रण नहीं किया गया तो और भी बड़ी घटनाएं घटित होंगी। लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही और ढिलाई की वजह से हालात जस के तस बने रहे।
आज फिर हुआ दर्दनाक हादसा – मासूम की आंख पर टांके
आज पुनः उसी स्थान पर, गणेश पंडाल के सामने, तीन बैल और गायों की भिड़ंत ने कई घरों का चैन छीन लिया। इस हादसे में तीन पड़ोसियों समेत एक 13 महीने का मासूम बच्चा भी गंभीर रूप से घायल हो गया। मासूम के आंख के ऊपर गहरी चोट आई और उसे चार टांके लगाने पड़े। परिजनों का कहना है कि मासूम की चीख-पुकार देख दिल दहल उठा, लेकिन प्रशासन और नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से आंखें मूंदे बैठे हैं।
लोगों का आक्रोश – आखिर जिम्मेदार कौन?
शहरवासी सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इन मौतों और गंभीर चोटों के लिए जिम्मेदार कौन है?
क्या नगर पालिका प्रशासन, जिसकी जिम्मेदारी है कि वह नागरिक सुरक्षा और व्यवस्था सुनिश्चित करे?
या फिर वह लोग, जो पशुओं को पालकर उन्हें खुला छोड़ देते हैं?
आम जनता का कहना है कि नगर पालिका के पास पर्याप्त संसाधन और कर्मचारी होने के बावजूद सड़कों पर आवारा पशुओं का जमावड़ा आम बात है। कई बार शिकायतें करने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।
कलेक्टर के आदेश की हो रही अवहेलना
जानकारी के मुताबिक, जिला प्रशासन की ओर से कई बार आदेश दिए गए हैं कि आवारा मवेशियों को पकड़कर गोशाला या सुरक्षित स्थान पर रखा जाए। लेकिन नगर पालिका प्रशासन की लापरवाही और गाय पालकों की गैरजिम्मेदारी के चलते ये आदेश कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। सवाल उठता है कि कलेक्टर के आदेश की अवहेलना आखिर कब तक चलेगी और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्यवाही क्यों नहीं हो रही है?
स्थानीय नागरिकों की मांग
नगर के भीतर घूम रहे आवारा पशुओं को तत्काल पकड़कर सुरक्षित स्थान पर रखा जाए।
मृतकों के परिवार और घायलों को मुआवजा दिया जाए।
नगर पालिका और प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
गाय पालकों को चेतावनी दी जाए कि यदि उन्होंने अपने पशुओं को सड़कों पर खुला छोड़ा तो उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही होगी।
जनता भुगत रही है सजा, जिम्मेदार बने मौन…
आज सवाल यह है कि मासूम की आंख पर लगे टांके और दो परिवारों के उजड़े घरों का दर्द आखिर कौन समझेगा? क्या प्रशासन इन हादसों से सबक लेगा या फिर लापरवाही और अनदेखी का यह सिलसिला यूं ही जारी रहेगा?
आम जनता का साफ कहना है कि नागरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, यदि वे अपना दायित्व ईमानदारी से निभाते, तो आज दो युवकों की जान न जाती और एक मासूम को इतनी पीड़ा सहनी न पड़ती।
दल्ली-राजहरा में आवारा पशुओं का आतंक सिर्फ सड़क दुर्घटनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नगर की प्रशासनिक व्यवस्था की पोल भी खोलता है। यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में और भी बड़ी घटनाएं सामने आ सकती हैं। सवाल यही है कि “नागरिकों की जान की कीमत आखिर कब तक लापरवाही की भेंट चढ़ती रहेगी?”
✍️ यह खबर सिर्फ एक घटना का ब्यौरा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और जिम्मेदार तंत्र की विफलता का कड़ा प्रमाण है।








