रायपुर। राजधानी रायपुर के चर्चित तेलीबांधा गोलीकांड मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। लॉरेंस बिश्नोई के करीबी कुख्यात गैंगस्टर मयंक सिंह को रायपुर लाने की तैयारी तेज कर दी गई है। छत्तीसगढ़ एटीएस ने झारखंड एटीएस की मदद से उसे गिरफ्तार किया है।
अज़रबैजान से प्रत्यर्पण के जरिए भारत लाया गया

जानकारी के मुताबिक, मयंक सिंह को अज़रबैजान से गिरफ्तार कर प्रत्यर्पण प्रक्रिया के जरिए भारत लाया गया। गिरफ्तारी के बाद से ही एटीएस टीमें उससे लगातार पूछताछ कर रही हैं।
तेलीबांधा गोलीकांड में मुख्य आरोपी
13 जुलाई 2024 को रायपुर के पीआरए ग्रुप के दफ्तर पर हुए गोलीकांड की साजिश मयंक सिंह ने रची थी। पल्सर बाइक पर सवार दो शूटरों ने दफ्तर के बाहर अंधाधुंध फायरिंग कर दहशत फैलाने की कोशिश की थी। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा कर्मियों ने भी फायरिंग की, जिसके बाद शूटर मौके से फरार हो गए।
पुलिस ने बाद में बाइक (JH 01 DL 4692) बरामद की थी और झारखंड-पंजाब में कार्रवाई कर 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
अपराध की लंबी फेहरिस्त
एटीएस सूत्रों के अनुसार, मयंक सिंह का गैंग छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान, यूपी और दिल्ली तक फैला है।
उस पर लगे आरोप:
पीआरए ग्रुप ऑफिस फायरिंग
हथियारों की तस्करी
बड़े कारोबारियों को धमकी और रंगदारी
महिलाओं के जरिए ब्लैकमेलिंग
हत्या और लूट के कई मामले

इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस
10 अक्टूबर 2024 को इंटरपोल ने मयंक सिंह के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। तब से ही वह फरार चल रहा था और अंतरराज्यीय गैंग चला रहा था।
अमन साव का एनकाउंटर
तेलीबांधा फायरिंग केस से जुड़े झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर अमन साव को इसी साल मार्च में पुलिस एनकाउंटर में मार गिराया गया था।
रांची पुलिस उसे हजारीबाग ले जा रही थी, तभी पलामू जिले में उसके गुर्गों ने पुलिस काफिले पर बम हमला किया। भागने की कोशिश के दौरान पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में उसे ढेर कर दिया।
एटीएस की अगली रणनीति
छत्तीसगढ़ एटीएस अब मयंक सिंह को ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाने वाली है। यहां उससे गैंगवार, फायरिंग और रंगदारी के मामलों में पूछताछ होगी। पुलिस को उम्मीद है कि उसकी गिरफ्तारी से प्रदेश और झारखंड में सक्रिय अपराधी नेटवर्क की कई कड़ियां खुलेंगी।
यह पूरा मामला न सिर्फ रायपुर बल्कि देशभर में फैले गैंगस्टर नेटवर्क की गहरी जड़ों को उजागर करता है।








