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गरियाबंद : 8 लाख की ईनामी महिला नक्सली ने किया आत्मसमर्पण

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शासन की पुनर्वास नीति और आत्मसमर्पित साथियों के खुशहाल जीवन से हुई प्रभावित



ब्यूरो नूतन साहू गरियाबंद। शासन की नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास योजना का असर एक बार फिर दिखाई दिया है। नगरी एरिया कमेटी की सचिव और 8 लाख रुपये की ईनामी महिला नक्सली जानसी उर्फ वछेला मटामी ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है।

नक्सल संगठन से जुड़ाव

जानसी मूलतः ग्राम कोंदावाही, थाना गट्टा, जिला गढ़चिरौली (महाराष्ट्र) की निवासी है।

वर्ष 2005 से संगठन से जुड़कर उसने विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं।

जनमिलिशिया सदस्य, एलओएस कार्यकर्ता, गार्ड, प्रेस प्रभारी, डिप्टी कमांडर और अंततः नगरी एरिया कमेटी सचिव तक का सफर तय किया।

पति सत्यम गावडे भी माओवादी संगठन में सक्रिय था, जो एक मुठभेड़ में मारा गया।


आत्मसमर्पण की वजह

जानसी ने बताया कि—

माओवादी अब निर्दोष ग्रामीणों की हत्या, विकास कार्यों में बाधा, अवैध वसूली और छोटे कैडरों के शोषण का अड्डा बन चुके हैं।

संगठन के झूठे वादों और अमानवीय गतिविधियों से उसका मन विचलित हो गया।

शासन की पुनर्वास नीति से लाभान्वित हुए पूर्व नक्सलियों के खुशहाल जीवन को देखकर उसने भी मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

पति की मौत और जंगल की कठिनाइयों ने भी इस फैसले को और मजबूत किया।




शासन द्वारा आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को—

पदानुसार इनामी राशि,

हथियार के साथ आत्मसमर्पण पर अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि,

आवास, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।


इन्हीं सुविधाओं और गरियाबंद पुलिस द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों से प्रभावित होकर जानसी ने हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण का रास्ता चुना।

पुलिस का योगदान

आत्मसमर्पण में सुकमा पुलिस का विशेष योगदान रहा। पुलिस लगातार पोस्टर, पाम्पलेट और गांवों में जागरूकता के माध्यम से नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित कर रही है।

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