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खैरागढ़ के जालबांधा में आवारा कुत्तों का कहर: बाजार चौक में दो बछड़ों पर हमला, एक को नोंच-नोंचकर खा गए, दूसरे की हालत गंभीर

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खैरागढ़ से रवि गहने की रिपोर्ट

खैरागढ़ (जालबांधा) ! खैरागढ़ क्षेत्र के जालबांधा गांव में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। सोमवार सुबह बाजार चौक में हुई दर्दनाक घटना ने लोगों को दहला दिया। आवारा कुत्तों के झुंड ने खुलेआम दो मासूम बछड़ों पर हमला कर दिया। इनमें से एक बछड़े को कुत्तों ने मौके पर ही नोंच-नोंचकर खा डाला, जबकि दूसरा बछड़ा गंभीर रूप से घायल हो गया है और उसका इलाज चल रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि यह घटना सुबह करीब 6 बजे की है, जब बाजार चौक के पास आवारा कुत्तों का झुंड अचानक वहां घूम रहे बछड़ों पर टूट पड़ा। स्थानीय लोगों ने लाठी-डंडों से कुत्तों को भगाने की कोशिश की, लेकिन तब तक एक बछड़े की जान जा चुकी थी।

सरकार की गौशालाएं नाकाम, सड़कों पर भटकते आवारा पशु

राज्य सरकार ने पशुधन की देखभाल के लिए जगह-जगह गौशालाओं का निर्माण कराया है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। जालबांधा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में कई आवारा पशु इन गौशालाओं में जगह न मिलने के कारण सड़कों पर भटकने को मजबूर हैं। इससे न सिर्फ जानवरों की जान पर खतरा मंडरा रहा है, बल्कि किसानों की फसलें भी तबाह हो रही हैं।

वर्तमान में खरीफ सीजन के चलते किसान अपने खेतों में दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। लेकिन आवारा पशुओं के झुंड खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। यह स्थिति किसानों के लिए दोहरी मार बन गई है – एक तरफ महंगाई और मौसम की मार, दूसरी ओर पशु संकट।

ग्रामीणों ने प्रशासन से की कार्रवाई की मांग

इस दर्दनाक घटना के बाद ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और पशु पालन विभाग से मांग की है कि:

आवारा कुत्तों की आबादी पर नियंत्रण किया जाए।

गौशालाओं की स्थिति की समीक्षा कर सुधार किया जाए।

आवारा पशुओं को समुचित संरक्षण और भोजन मिले।

किसानों की फसल सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।


प्रशासन मौन, समाधान अधूरा

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस घटना को कितनी गंभीरता से लेता है। क्या सिर्फ जांच और खानापूर्ति तक ही सीमित रहेगा, या फिर वाकई में कोई ठोस कार्ययोजना बनाकर गांवों को इस संकट से मुक्ति दिलाई जाएगी?

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