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खतरे में मासूमों का भविष्य!
खैरागढ़ की शासकीय प्राथमिक शाला पेटी में दरारों के बीच पढ़ाई, दीवार गिरने का इंतजार कर रहा प्रशासन?

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रवि गहने खैरागढ़ ! राजस्थान में ही में एक जर्जर स्कूल भवन गिरने से बच्चों की जान पर बनी थी, लेकिन लगता है कि उससे कोई सबक नहीं लिया गया। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला पेटी में भी हालात कुछ ऐसे ही बन चुके हैं। भवन की छत से पानी टपक रहा है, दीवारें जमीन में धंस रही हैं, और ब्लैकबोर्ड तक दरारें पहुँच चुकी हैं — फिर भी बच्चों की पढ़ाई जारी है।



संकुल करमतरा अंतर्गत आने वाला यह स्कूल हादसे को दावत दे रहा है।


यहां 61 बच्चे अध्ययनरत हैं, लेकिन स्कूल की जर्जर स्थिति के कारण बच्चे क्लास में बैठने से डरते हैं। छत से पानी टपकता है और दीवारें इतनी कमजोर हो चुकी हैं कि देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की तस्वीर तक नीचे गिरती दीवारों के साये में लटक रही है — यह न सिर्फ शिक्षण संस्थानों की दुर्दशा का प्रतीक है, बल्कि एक चेतावनी भी है।



पालकों की चिंता, जिम्मेदारों की चुप्पी:


बच्चों के पालक स्कूल की हालत देख कर चिंतित हैं। कई अभिभावकों ने तो अब गांव वालों के सहयोग से बच्चों को दूसरे सुरक्षित स्थान पर पढ़ाना शुरू कर दिया है। वर्ष 2023-24 में ही उच्च अधिकारियों को स्कूल भवन की हालत से अवगत कराया गया था, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

प्रशासन को हादसे का इंतजार?


स्कूल में केवल दो कमरे और एक बरामदा है, जो पूरी तरह से खस्ताहाल हो चुका है। बावजूद इसके, प्रधान पाठक द्वारा अपनी मर्जी से आदेशों की अनदेखी कर जर्जर भवन में कक्षाएं संचालित की जा रही थीं।

राजस्थान जैसी कोई दुर्घटना यहां ना घटे — यह दुआ ही की जा सकती है। लेकिन क्या हमारे बच्चों की सुरक्षा किसी ‘दुर्घटना’ के बाद ही सुनिश्चित की जाएगी?

अब सवाल उठता है —


क्या शासन-प्रशासन को बच्चों की जान से ज्यादा कोई आदेश या फाइलें भारी लगती हैं?
क्या जिम्मेदार अफसर किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहे हैं?

सरकार को चाहिए कि जल्द से जल्द इस स्कूल की मरम्मत कार्य प्रारंभ कर बच्चों को सुरक्षित शिक्षा का वातावरण प्रदान करें, नहीं तो यह लापरवाही कभी भी मासूम जिंदगियों को लील सकती है।

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