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ईंट भट्ठा मालिकों को मिला धोखे का ‘भट्टा’ बैठा, पुलगांव पुलिस बनी सुपरहीरो, चंद घंटों में पकड़ लाए ईंटों के सौदागर ठग।

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पुलगांव थाना क्षेत्र में इन दिनों एक नई बीमारी फैली है — “ठगोफ्लू”। इसका असर इतना जबरदस्त है कि भट्ठा मालिकों की नींद उड़ गई है और ठगों के सपने टूट गए हैं।

मामला कुछ यूं है कि नीलकंठ कुंभकार जी (उर्फ़ भरोसे के भंडार) ने सोचा था कि वो इस साल अपने ईंट भट्ठे में धड़ाधड़ मज़दूर बुलवाकर धंधा चमकाएंगे। लेकिन गांव में आए दो नए “HR मैनेजर” — तीजराम केवट और कमल सिंह निषाद — ने उन्हें ऐसे सपने दिखाए जैसे नेताजी चुनाव से पहले दिखाते हैं।

बातों-बातों में तीजराम ने नीलकंठ जी से ठोक के ₹10,35,000 और कमल बाबू ने अलग से ₹9,32,000 रुपये ऐंठ लिए। मज़दूरों की गाड़ी तो क्या, एक ट्रॉली भी नहीं आई। उधर अभिषेक चक्रधारी जी ने भी सोचा कि भाई मज़दूर तो अब तीजराम ही दिलवाएगा, और उन्होंने पूरे ₹15 लाख थमा दिए।

मज़दूर नहीं, मज़बूरी आई।

जब ईंटें रखी रह गईं और कोई उठाने वाला नहीं मिला, तो दोनों भट्ठा मालिकों ने पुलिस का दरवाज़ा खटखटाया। पुलगांव पुलिस ने बिना चाय पीए, मिशन “ठग पकड़ो” शुरू किया।

सीन 1: पुलिस पहुंची सिरियाडीह और कोईदा गाँव।
सीन 2: तीजराम और कमल ने पहले तो कहा, “मज़दूर बस निकलने ही वाले हैं सर।”

सीन 3: फिर बोले, “थोड़ा बहुत पैसा वापस दे देते हैं, समझौता कर लीजिए।”

सीन 4: पुलिस बोली – “समझौता तो अब कोर्ट में होगा बेटा!” और दोनों को ₹60,000 के साथ धर दबोचा।

आरोपी स्पेशल:

1️⃣ तीजराम केवट – जो हर वादे में “आज नहीं तो कल” कहकर लोगों को कल्लू बना देता था।
2️⃣ कमल सिंग निषाद – जिसने मज़दूर तो दिए नहीं, लेकिन मजदूरी की एडवांस पेमेंट से मोबाइल, मूंगफली और मटर की सब्जी जरूर खरीद ली।

अब सवाल यह है:

> “भट्ठा मालिकों को मज़दूर नहीं मिले, पर ठगों को क्या मिला?”

जवाब: एक मुफ्त का जेल टूर और पुलगांव पुलिस की शानदार मेहमाननवाज़ी!

और हां, मज़दूरों को खोजने की जिम्मेदारी अब न्यायालय पर है…

फूल स्टॉप नहीं, ये तो कॉमा है… ठगों का अगला एपिसोड जल्द!

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