दुर्ग। 21–22 जून की रात को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के दादरपुर गाँव में एक भगवद् कथा कार्यक्रम के दौरान कोविडात्मक घटना सामने आई। कथावाचक म मुकुट मणि यादव एवं सहायक संत कुमार यादव विशेष रूप से आमंत्रित थे। बताया गया कि जब कथावाचकों से उनकी जाति की पहचान पूछी गई, तब उसे यादव बताया गया। इसके बाद उनका चोटी काट दी गई, शारीरिक रूप से अपमानित किया गया और सार्वजनिक रूप से पीटा गया। आरोप है कि उन्हें जमीन पर नाक रगड़ने जैसे अपमानजनक कृत्यों के भी लिए मजबूर किया गया ।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिससे पूरे प्रदेश में भारी आक्रोश फैल गया। वीडियो में कथावाचकों को चीखते हुए और अपमानित होते हुए दिखाया गया है। कई स्रोतों के अनुसार आरोपितों ने कथावाचकों पर मूत्र छिड़कने जैसे अमानवीय व्यवहार भी किये ।
व्यासपीठ से उतार कर चोटी काटना, मारपीट करना, ब्राह्मणी मूत्र से कथित “शुद्धि” करना, आभूषण छीनना तथा जबरन धन ऐंठना यह सब न केवल अमानवीय आचरण हैं, बल्कि संविधान प्रदत धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक सम्मान और गरिमा के घोर उल्लंघन भी हैं। यह घटनाक्रम कोई एक isolated incident नहीं है- पूर्व में छत्तीसगढ़ की यामिनी साहू एवं मध्य प्रदेश की देविका पटेल के साथ भी इसी प्रकार का अपमानजनक व्यवहार हुआ, जिसकी पुलिस में शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई अब तक नहीं हुई। इस प्रकार की घटनाएं उस मानसिकता को उजागर करती हैं जो सनातन परंपरा, वर्ण-व्यवस्था की मर्यादा तथा सामाजिक समरसता को कलंकित कर रही है। यदुवंशियों को श्रीकृष्ण की कथा कहने से रोकना न केवल धार्मिक उत्पीडन है, बल्कि सभ्य समाज के मूल्यों पर भी आघात है। अखिल भारतीय यदुवंशम् महासभा, भारतवर्ष के 36 करोड़ यदुवंशियों की भावनाओं को अभिव्यक्त करते हुए, महामहिम से निम्नलिखित मांग करती है
उक्त घटना की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष जांच कराई जाए।
1. दोषियों के विरुदध कठोर विधिक कार्रवाई की जाए।
पीडित कथावाचकों को सुरक्षा एवं न्याय दिलाया जाए।
004. भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं न हो इसके लिए दिशानिर्देशा सुनिश्चित किया जाए।

पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी
वीडियो वायरल होते ही इटावा पुलिस सक्रिय हुई। शुरुआती जांच में चार लोगों—आशीष तिवारी, उत्तम कुमार अवस्थी, निकी अवस्थी और मनु दुबे—को गिरफ्तार किया गया । बाद में इसके विरोध में यादव समाज के लोग दादरपुर गाँव में खून-खराबा करने पहुंचे, जिस पर पुलिस ने पत्थरबाजी को नियंत्रित करने के लिए हवा में गोलियाँ भी चलाई और करीब 19–23 लोगों को गिरफ्तार किया गया ।
एफआईआर की प्रक्रिया और मुकदमेबाजी
बकेवर थाने में कथावाचकों पर भी शिकायत दर्ज हुई, जिसमें कथित रूप से कथावाचक द्वारा पहचान छुपाने और छेड़खानी जैसे आरोप शामिल हैं । दूसरी ओर, अदालतों में जाति-आधारित हिंसा के आरोपों में कई अन्य व्यक्तियों—20 की पहचान और 100 अज्ञात—खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने लगभग 19 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है और समाज में भूचाल का माहौल है ।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी और प्रमुख नेता जैसे अखिलेश यादव, आदित्य यादव, सांसद आदि ने घटना की निंदा की। अखिलेश यादव ने इस कृत्य को राज्य सरकार द्वारा PDA (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) समाज के विरुद्ध सरकारी पक्षपोषण बताया और दो पीड़ितों को 51,000–21,000 रुपये देने सहित मान-सम्मान की पेशकश की । आदित्य यादव ने इसे “गहरी साजिश” बताया और जातिगत भेदभाव बंद करने की बात कही ।
दूसरी ओर, भाजपा सरकार ने स्थिति को वामपंथियों या दोषियों द्वारा भड़काया दर्शाया। यूपी सरकार के मंत्री जयवीर सिंह ने इसे कानून-व्यवस्था की विफलता मानने की बजाय अराजक तत्वों का कृत्य बताया तथा जातिगत रंग न लगाने की अपील की ।
सामाजिक प्रभाव और पड़ोसी राज्यों में असर
बिहार में ईस्ट चम्पारण के टिकुलिया गाँव में ब्राह्मणों के पूजा करने पर रोक लगाने वाले नोटिस लगाए गए; यह प्रतिशोध के रूप में इटावा घटना से प्रेरित थे। हालांकि, स्थानीय लोग इस कदम को कईयों का निजी काम बता कर नोटिस तुरंत हटा दिया ।









