कोण्डागांव से बन्नूराम यादव की रिपोर्ट
कोण्डागांव ! जिले में आदिवासी प्रताड़ना के एक गंभीर मामले में पुलिस द्वारा अब तक एफआईआर दर्ज न किए जाने को लेकर आदिवासी युवक रामचंद मरकाम ने कड़ा विरोध जताया है। रामचंद ने मंगलवार को जिला कलेक्टर कोण्डागांव को लिखित आवेदन देकर अनुरोध किया कि इस मामले की सूचना भारत की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु तक पहुंचाई जाए, ताकि वह आदिवासी समाज की वास्तविक स्थिति से अवगत हो सकें।
रामचंद ने अपने आवेदन में उल्लेख किया है कि 29 जनवरी 2024 को उन्होंने दं.प्र.सं. धारा 154(3) के तहत पुलिस अधीक्षक कोण्डागांव को शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप था कि थाना प्रभारी, आजाक कोण्डागांव ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत संज्ञेय अपराध होने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की। इस पर उन्होंने कानूनन पुलिस अधीक्षक से हस्तक्षेप की मांग की, परंतु 1 वर्ष 6 माह 14 दिन बीत जाने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
आरटीआई भी जोड़ा, 100 रुपए डॉक खर्च के लिए भेजे
रामचंद ने आवेदन के साथ 29 जनवरी 2024 को एसपी को दिए गए शिकायत पत्र की छायाप्रति, आरटीआई आवेदन तथा रजिस्टर्ड डाक खर्च के लिए लिफाफे में 100 रुपए भी संलग्न किए। उनका कहना है कि कोण्डागांव में शिकायतें समय पर निपटाई नहीं जातीं, लेकिन आरटीआई देने पर कार्रवाई तेज होती है। इसी कारण उन्होंने शुरू से ही आरटीआई जोड़ दी, ताकि समयसीमा में उत्तर मिल सके और आर्थिक भार शासन पर न पड़े।
कलेक्टर ने पुलिस अधिकारी को थमा दिया आवेदन
रामचंद का आरोप है कि कलेक्टर को आवेदन देने के बावजूद उन्होंने इसे सीधे राष्ट्रपति को भेजने का निर्देश नहीं दिया, बल्कि जनदर्शन में मौजूद पुलिस अधिकारी को सौंप दिया। रामचंद का कहना है कि उन्होंने बार-बार आग्रह किया कि यह आवेदन राष्ट्रपति तक भेजा जाए, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई।
जिला प्रशासन की लचर व्यवस्था उजागर
इस प्रकरण ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि क्या पुलिस प्रशासन रामचंद की मांग पर आवेदन को राष्ट्रपति तक भेजता है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।








