बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में फर्जी दाखिलों और शिकायतों के निराकरण में देरी को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार से इस मामले में विस्तृत जवाब मांगा है और 24 मार्च तक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।
समाजसेवी सीवी भगवंत राव की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि यह मामला बच्चों के मौलिक अधिकार से जुड़ा है, इसलिए केवल प्रक्रिया का हवाला देकर देरी को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
याचिका में बताया गया कि दुर्ग जिले में आरटीई के तहत निजी स्कूलों में 74 बच्चों के फर्जी दाखिले पाए गए हैं। वहीं वर्ष 2025 में दर्ज 591 शिकायतों के निराकरण में भी देरी की गई। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए सरकार से जवाब मांगा है।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि 10 बच्चों को गलत तरीके से स्कूल से निकाला गया और 118 बच्चों को अपात्र घोषित किया गया। इस मामले में भी अदालत ने सरकार से 24 मार्च तक स्पष्टीकरण मांगा है।
कोर्ट में यह भी जानकारी दी गई कि बीपीएल और अंत्योदय कार्ड का दुरुपयोग कर अपात्र बच्चों को आरटीई के तहत दाखिला दिलाया गया। साथ ही आरटीई पोर्टल में वेबसाइट हैकिंग के मामले भी सामने आए हैं, जिसे अदालत ने गंभीर माना है।
अदालत ने आरटीई अधिनियम के तहत स्कूलों के लिए स्पष्ट गाइडलाइन अब तक तैयार नहीं होने पर भी सवाल उठाए हैं। शिक्षा विभाग ने अपने शपथपत्र में बताया कि विस्तृत गाइडलाइन तैयार करने की प्रक्रिया जारी है और इसके लिए विभागीय समिति गठित कर बैठक भी की गई है।
हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई में फर्जी दाखिलों से जुड़े मामलों में की गई कार्रवाई का पूरा विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं और बच्चों के हितों से जुड़े इस मुद्दे पर जल्द ठोस कदम उठाने को कहा है।
आरटीई में फर्जी दाखिलों पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब








