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देवभोग हाउसिंग बोर्ड आवंटन विवाद, पात्रता नियमों की खुली अनदेखी

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पितेश्वर हरपाल गरियाबंद। देवभोग के हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में सरकारी रूमों के आवंटन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि कई रूमों का आवंटन नियमों को दरकिनार कर प्रभावशाली लोगों को किया गया है। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग की है।

सूत्रों के मुताबिक, पति-पत्नी को अलग-अलग रूम, पटवारी को बिना आदेश के रूम, और शिक्षक व पंचायत सचिव को मुख्यालय से बाहर आवास दिया गया है। इतना ही नहीं, जिन कर्मचारियों का ट्रांसफर अन्य जिलों में हो चुका है, उनके नाम पर भी रूम आवंटित हैं। यह सब छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड अधिनियम के स्पष्ट उल्लंघन के अंतर्गत आता है।

अधिनियम के अनुसार, आवास केवल उन्हीं को दिया जा सकता है जो पात्र हैं — जैसे शासकीय सेवक, निम्न या मध्यम आय वर्ग के व्यक्ति, जिनका मुख्यालय उसी क्षेत्र में है। एक ही परिवार के दो सदस्यों को अलग रूम देना या बिना आदेश किसी को आवास देना पूर्णतः अवैध है।

ग्रामीणों ने बताया कि हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी का उद्देश्य जरूरतमंद सरकारी कर्मचारियों को आवास उपलब्ध कराना था, लेकिन अब यह “सुविधा और सिफारिश आधारित प्रणाली” बन गई है। जनप्रतिनिधियों ने कलेक्टर गरियाबंद और हाउसिंग बोर्ड आयुक्त से मांग की है कि बिना पात्रता के रूम पाने वालों पर कार्रवाई की जाए, ट्रांसफर वाले कर्मचारियों से रूम खाली कराया जाए, और आवंटन सूची सार्वजनिक की जाए।

पूर्व में भी इस कॉलोनी में ऐसे विवाद सामने आ चुके हैं, लेकिन जांच के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन कितनी गंभीरता से इस मामले को लेता है।
कलेक्टर भगवान सिंह ऊकेई ने कहा— “मुझे जानकारी नहीं थी, पर मैं इसकी जांच करवा रहा हूं।”

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