कोण्डागांव से बन्नूराम यादव की रिपोर्ट
कोण्डागांव ! छत्तीसगढ़ सरकार के एक वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में कोंडागांव वन मंडल ने 9 से 20 दिसंबर 2024 के मध्य विभिन्न वन प्रबंधन समितियों के सहयोग से जन चौपाल और वृक्षारोपण अभियान का सफल आयोजन किया। इस आयोजनों में शासन के जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी लोगों को दिया गया। जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग शासन के योजनाओं से लाभान्वित हो सकें। यह आयोजन मर्दापाल, बोटीकनेरा, उमरगांव, बोथा, चांगेर, सोनाबाल, गोलावण्ड, बम्हनी, कोपाबेड़ा, गुलभा और काकड़गांव सहित अन्य क्षेत्रों में किया गया। एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत किसानों के बाड़ियों में फलदार पौधे लगाए गए। वन प्रबंधन समिति की नर्सरियों में उपलब्ध पौधों का निःशुल्क वितरण किया गया, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।
जनचौपाल में विभिन्न योजनाओं की जानकारी
जन चौपाल में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी साझा की गई। तेन्दूपत्ता संग्राहकों के लिए प्रति मानक बोरा भुगतान राशि को 4 हजार रुपये से बढ़ाकर 5 हजार पांच सौ किया गया है। यह निर्णय संग्राहकों के जीवन में बड़ा बदलाव लाएगा और संग्राहकों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। किसानों को किसान वृक्ष मित्र योजनाष् के तहत शासन द्वारा 5 एकड़ भूमि पर निःशुल्क 5 हजार पौधे उपलब्ध कराया जाता है । यह योजना पर्यावरण संरक्षण के साथ किसानों की आय में वृद्धि का भी अच्छा माध्यम है। वन प्रबंधन समितियों के अंतर्गत गठित स्व-सहायता समूहों को 4ः ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। यह राशि व्यक्तिगत आय के लिए रोजगार के संसाधन स्थापित करने के लिए दिया जाता है ।
वन्यप्राणी क्षति मुआवजा में बढ़ोतरी
वन्यप्राणी से मृत्यु पर 6 लाख रुपये, स्थायी अपंगता पर 2 लाख रूपये, घायल होने पर 59 हजार एक सौ रुपये, पशु हानि पर 30 हजार रुपये और फसल हानि पर 9 हजार रुपये प्रति एकड़ के मान से मुआवजा राशि दी जाती है।
लघु वनोपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृध्दि
शासन द्वारा कोदो, कुटकी, रागी, लाख, शहद और अन्य लघु वनोपज उत्पादों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि की गई है। जिससे लघु वनोपज संग्राहकों की आय में वृद्धि हो और उनके जीवन स्तर में सुधार आये। न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृध्दि से संग्राहकों की आय को स्थिर करेगा। अधिक आय मिलने से संग्राहक अपने परिवार की शिक्षा, स्वास्थ्य, और अन्य आवश्यकताओं पर खर्च कर सकेंगे, जिससे उनका जीवन स्तर बेहतर होगा। बेहतर मूल्य मिलने से संग्राहकों में लघु वनोपज उत्पादन और संग्रहण के प्रति रुचि बढ़ेगी। इससे इन उत्पादों की उपलब्धता भी बढ़ेगी।








