ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोंडागांव। बच्चों के हितों की सुरक्षा एवं उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 10 अप्रैल 2026 को एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री खिलावन राम रीगरी ने की।
न्यायिक अधिकारियों की रही उपस्थिति
प्रशिक्षण में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्री विक्रम प्रताप चन्द्रा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) प्रतिभा मरकाम, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती रेशमा बैरागी पटेल, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गायत्री साय, जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती भारती प्रधान सहित खण्ड शिक्षा अधिकारी, अधिवक्ता एवं अधिकार मित्र उपस्थित रहे।
बाल अधिकारों पर दी गई महत्वपूर्ण जानकारी
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों के अधिकारों, पॉक्सो एक्ट, शिक्षा के अधिकार अधिनियम तथा बाल संरक्षण से जुड़े प्रावधानों की जानकारी देना रहा। साथ ही विद्यालयों में इन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी चर्चा की गई।
प्रधान न्यायाधीश ने दिए आवश्यक निर्देश
प्रधान न्यायाधीश ने बाल श्रम निषेध, बाल विवाह रोकथाम, विद्यालयों में सुरक्षा उपाय एवं बच्चों के साथ होने वाले शोषण, उत्पीड़न और भेदभाव की रोकथाम पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि कोई विद्यार्थी लगातार 3-4 दिनों तक अनुपस्थित रहता है, तो उसकी मॉनिटरिंग की जाए।
सुरक्षित और समावेशी वातावरण पर जोर
उन्होंने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। इस प्रकार के प्रशिक्षण से अधिकारियों और वालिंटियर्स की संवेदनशीलता और कार्यक्षमता में वृद्धि होती है, जिससे विद्यालयों में सुरक्षित और समावेशी वातावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।
शिक्षा विभाग ने की सराहना
जिला शिक्षा अधिकारी ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि यह शिक्षा विभाग के लिए अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रशिक्षण में मिली जानकारी को सभी शिक्षकों और छात्रों तक पहुंचाया जाए, ताकि बाल अधिकारों के प्रति व्यापक जागरूकता सुनिश्चित हो सके।








