ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोण्डागांव। जिले के विकासखण्ड फरसगांव के दूरस्थ ग्राम पंचायत चिंगनार में एक समय माओवाद के प्रभाव से भय और असुरक्षा का माहौल था, लेकिन अब शासन की पुनर्वास नीति के चलते यहां शांति और विकास की नई तस्वीर देखने को मिल रही है। इसी बदलाव की मिसाल बने हैं पवन कुमार, जिन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर जीवन की नई शुरुआत की है।
हिंसा का रास्ता छोड़ लिया बड़ा निर्णय
पवन कुमार पूर्व में माओवादी संगठन से जुड़े हुए थे। उस समय उनका जीवन असुरक्षा और कठिनाइयों से भरा हुआ था। परिवार के साथ जंगल किनारे एक जर्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर पवन कुमार ने समय के साथ यह समझा कि हिंसा का मार्ग केवल विनाश की ओर ले जाता है। इसके बाद उन्होंने साहसिक निर्णय लेते हुए आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुना।
पुनर्वास योजना से मिला पक्का घर
आत्मसमर्पण के बाद शासन की पुनर्वास नीति के तहत पवन कुमार को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में पक्का आवास स्वीकृत किया गया। जिला प्रशासन द्वारा उन्हें चरणबद्ध तरीके से आर्थिक सहायता प्रदान की गई—प्रथम किश्त में 40 हजार रुपये, द्वितीय किश्त में 55 हजार रुपये और अंतिम किश्त में 25 हजार रुपये दिए गए।
मनरेगा से मिला अतिरिक्त सहारा
आवास निर्माण के दौरान महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत 90 दिनों की मजदूरी भी उपलब्ध कराई गई। इस आर्थिक सहयोग से उन्होंने समय पर अपना घर पूरा कर लिया।
मूलभूत सुविधाओं से बदला जीवन स्तर
नए घर के साथ पवन कुमार के परिवार को बिजली कनेक्शन, रसोई गैस, शौचालय और नल-जल जैसी आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। इन सुविधाओं से उनके जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और अब वे सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।
नई उम्मीदों के साथ आगे बढ़ते कदम
आज पवन कुमार अपने परिवार के साथ शांतिपूर्ण और खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं। उन्होंने शासन-प्रशासन की इस पहल के प्रति आभार जताते हुए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया है। उनकी कहानी अब क्षेत्र में बदलाव और सकारात्मक प्रेरणा का प्रतीक बन गई है।








