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रिंगो कश्यप ने दूरस्थ गांवों तक बैंकिंग सुविधा पहुंचाकर बदलाव की मिसाल

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ब्यूरो चीफ बन्नूराम यादव कोंडागांव । मर्दापाल तहसील के अंतर्गत सुदूर ग्राम कुधुर, जो कभी माओवाद के प्रभाव के कारण विकास से दूर था, आज बदलाव की नई मिसाल बन रहा है। गांव में अब बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध होने से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है।

पहले 20 किमी दूर जाना पड़ता था बैंक

कभी ग्रामीणों को शासकीय योजनाओं की राशि निकालने के लिए लगभग 20 किलोमीटर दूर मर्दापाल के बैंक जाना पड़ता था। इससे समय और संसाधनों की काफी हानि होती थी।

बीसी सखी बनकर लाई बदलाव

यह सकारात्मक परिवर्तन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बीसी सखी के रूप में कार्यरत रिंगो कश्यप के प्रयासों से संभव हुआ है। वे कुधुर के साथ-साथ तुमड़ीवाल और टेकापाल गांवों में भी घर-घर बैंकिंग सेवाएं दे रही हैं।

स्व-सहायता समूह से शुरू हुई यात्रा

रिंगो कश्यप ने वर्ष 2020 में “मां पार्वती स्व सहायता समूह” से जुड़कर अपनी शुरुआत की। वर्ष 2024 में प्रशिक्षण प्राप्त कर उन्होंने बीसी सखी के रूप में कार्य करना शुरू किया।

सरकारी योजनाओं का मिल रहा सीधा लाभ

उनके माध्यम से अब ग्रामीणों को महतारी वंदन योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं की राशि गांव में ही आसानी से मिल रही है। साथ ही बिजली बिल भुगतान और अन्य लेनदेन भी सरल हो गए हैं।

355 से अधिक लेनदेन, लाखों की राशि का भुगतान

अब तक रिंगो कश्यप 355 से अधिक सफल लेनदेन कर चुकी हैं, जिनकी कुल राशि 6 लाख 75 हजार रुपये से अधिक है। इससे ग्रामीणों की समस्याएं काफी हद तक कम हुई हैं।

स्वरोजगार से बढ़ी आर्थिक स्थिति

रिंगो कश्यप ने स्व-सहायता समूह से ऋण लेकर एक किराना दुकान भी शुरू की है। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और उन्हें प्रतिमाह लगभग 10 हजार रुपये की आय हो रही है।

महिला सशक्तिकरण की मिसाल

रिंगो कश्यप जैसी महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से दूरस्थ क्षेत्रों में विकास को नई दिशा मिल रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बनते हुए समाज में अपनी अलग पहचान स्थापित कर रही हैं।

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