दुर्ग ! जिला अस्पताल दुर्ग के दंत विभाग में 23 वर्षीय युवक का जटिल चेहरे का ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया। मरीज सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था, जिससे उसकी गाल की हड्डी बुरी तरह से टूट कर दब गई थी। इससे मरीज को काफी तकलीफ हो रही थी।

मरीज को जांच के बाद सर्जरी के लिए तैयार किया गया। सर्जरी का नेतृत्व मैक्सिलोफ़ेशियल सर्जन, डॉ. कामिनी डडसेना ने किया, जिसमें टीम के अन्य सदस्य डॉ. बसंत चौरसिया (एनेस्थेटिस्ट), डॉ. देवेंद्र साहू (मेडिकल स्पेशलिस्ट), शिबेन दानी और नसरीन (स्क्रब नर्स), युगल किशोर, मोतिन, लता (ओटी टेक्नीशियन), और चितरंजन (वार्ड बॉय) शामिल थे। इसके अलावा, वार्ड नर्सिंग स्टाफ में मंजू रॉय, वंदना, चंचल, रेशमी और योगेश्वरी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस सर्जरी में मरीज के गाल व आंख के पास की टुकड़ों में टूटी और दबी हुई हड्डी (ज़ाइगोमैटिकोमैक्सिलरी हड्डी) को ठीक किया गया। ऑपरेशन के दौरान आंख के पास की हड्डी (ऑर्बिटल रिम) को पुनर्निर्मित किया गया और गाल की हड्डी को ट्रांसकंजंक्टिवल अप्रोच से ऊठाया गया। यह प्रक्रिया पूरी तरह से निशान रहित थी।
डॉ. कामिनी डडसेना ने बताया कि यह सर्जरी बेहद चुनौतीपूर्ण थी क्योंकि मरीज की उम्र बहुत कम थी और हमने ऑपरेशन के दौरान यह सुनिश्चित किया कि उसके चेहरे पर कोई भी निशान न बने। आंख के पास ऑपरेट करना जटिल होता है। हालांकि, जिला अस्पताल दुर्ग में इस तरह की सर्जरी पहले भी सफलतापूर्वक की जा चुकी है। इस बार भी अस्पताल की टीम की मेहनत और विशेषज्ञता से यह जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी हुई।
इस सर्जरी से न केवल मरीज को दर्द से राहत मिली, बल्कि उसका चेहरा भी सामान्य स्थिति में आ गया है। यह जिला अस्पताल दुर्ग के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।









