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उचित मूल्य की दुकान में ऊंचे दामों पर राशन बेचकर कहता है… मैं हूं खरोरा का विधायक

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खरोरा l खरोरा इलाका धरसींवा विधानसभा में आता है। फिलहाल अनुज शर्मा यहां से विधायक हैं। लेकिन, एक सरकारी राशन दुकान के संचालक ने खुद को अलग से खरोरा का विधायक घोषित कर रखा है। राशन दुकान में उचित मूल्य पर राशन खरीदने के लिए आने वालों को वो यही कहकर ऊंचे दामों पर सामान बेचता है। लोगों ने जब असली विधायक से इस रैवेये की शिकायत करने की बात कही तो उसका कहना था… यहां का विधायक में हूं। अनुज शर्मा धरसींवा का विधायक है। जिसे जो करना है, कर लो। कोई मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

दरअसल, खरोरा से लगा बूडेरा है। गांव में कुल जमा 900 कार्ड है। इन्हें दुकान क्रमांक 442004064 से सरकारी राशन की सप्लाई होती है। इस दुकान के संचालक रमेश शर्मा है। वह गांववालों से एक किलो शक्कर के पीछे 20 रुपए वसूल करता है। जबकि, इसे 17 रुपए प्रति किलो के हिसाब से दिया जाना है। इसके अलावा ई-केवायसी के नाम पर भी बड़ी धांधली हो रही है। सरकार ने परिवार के प्रत्येक सदस्य की ई-केवायसी इसलिए अनिवार्य की है, ताकि सोसाइटियों में राशन का घपला न हो। लेकिन, इस स्वयंभू विधायक ने ई-केवायसी में ही घपला

17 रुपए की शक्कर 20 रुपए में बिक रही

गांव वाले बोले- बड़े-बुजुर्गों से भी बदतमीजी से नहीं चूका

गांववालों की ये भी शिकायत है कि सोसाइटी हफ्ते में कभी चार दिन खुलती है, कभी पांच दिन। पूरे दिन कभी नहीं खुलती। इसे लेकर जब गांव के बड़े-बुजुर्गो ने शिकायत की तो संचालक उनसे भी बदतमीजी करने से नहीं चूका। सरपंच पंकज कुरें और उप सरपंच योगेश सिन्हा ने कहा, प्रदेश के सीएम से लेकर देश के पीएम तक हम अपनी बात रख चुके हैं। इसके बावजूद दुकान संचालक पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। हम अब और प्रताड़ना नहीं सहेंगे। संचालक की हरकतों से पूरा गांव परेशान है। लोगों को राशन नहीं मिल रहा। अब भी कार्रवाई न हुई तो पूरा गांव मिलकर सड़कों पर उतरेगा। तहसील कार्यालय का घेराव करेंगे।

रिश्वत लेते कैमरे में कैद हुआ संचालक।

गांववालों के मुताबिक संचालक ने प्रत्येक सदस्य की ई- केवायसी के लिए 20-20 रुपए तक वसूल किए हैं। जबकि, यह काम पूरी तरह से निशुल्क किया जाना है। सालों से चल रही इन गड़बड़ियों की शिकायत गांव वालों ने कुछ महीने पहले ही अफसर, सांसद-विधायकों से लेकर पीएम तक की थी। लेकिन, नतीजा सिफर रहा। यही वजह है कि संचालक के हौसले भी बुलंद होते गए। वह अब खुद विधायक को बताने से भी नहीं चूक रहा।

घोटाले का गणित… केवायसी से ही 4 लाख मिले, 32 हजार शक्कर के

सोसाइटी से मनमाफिक रेट पर अनाज बेचने की शिकायत सालों पुरानी है। अगर एक साल के लिए सिर्फ शक्कर का हिसाब देखें तो प्रत्येक महीने एक राशन कार्ड पर एक किलो शक्कर दिया जाता है। दुकान संचालक 900 कार्डधारियों से प्रति किलो 3 रुपए की उगाही कर रहा था। इस हिसाब से एक साल में शक्कर में ही की गई धांधली से तकरीबन 23 हजार रुपए का घोटाला हुआ। इसके अलावा 2 हजार से ज्यादा लोगों से ई-केवायसी के नाम पर 20 रुपए वसूले गए हैं। इस हिसाब से 4 लाख से ज्यादा की वसूली की गई है। इन दोनों को मिलाकर ही गड़बड़ी का आंकड़ा 4.32 लाख के पार चला जाता है

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